13 वर्ष की उम्र में वैराग्य की राह पर डुग्गू, दुर्ग में भव्य दीक्षा समारोह — अरुण वोरा बोले, यह संयम चमत्कार से कम नहीं

दुर्ग | महज 13 साल की उम्र में सांसारिक मोह-माया को त्याग कर संयम और वैराग्य की राह पर अग्रसर होने जा रहे रूहान मेहता उर्फ डुग्गू का भव्य दीक्षा समारोह शनिवार को राधाकृष्ण मंदिर प्रांगण, महेश कॉलोनी दुर्ग में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अरुण वोरा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने बालक डुग्गू के अद्भुत निर्णय को समाज के लिए प्रेरणास्पद मिसाल बताया। वोरा ने कहा,
“इतनी कम उम्र में सांसारिक सुखों का त्याग कर वैराग्य को अपनाना अत्यंत अद्भुत और प्रेरणादायक है। यह डुग्गू की धर्म, संयम और आत्मा के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक है। भगवान आदिनाथ से प्रार्थना करता हूं कि उसे अध्यात्म, सेवा और संयम का अद्वितीय संबल प्राप्त हो।”
आयोजन का उद्देश्य और स्वरूप
दीक्षा कार्यक्रम ‘सत्वनाद संयमोत्सव’ के अंतर्गत श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया। विनय कुशल मुनिजी महाराज साहब के सान्निध्य में दीक्षा विधि सम्पन्न हुई। आयोजन में लापसी लूट, महाभिनिष्क्रमण यात्रा, और शोभायात्रा जैसे पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कौन हैं डुग्गू?
रूहान मेहता उर्फ डुग्गू, का जन्म 1 जून 2012 को जोधपुर (राजस्थान) में हुआ। वे श्री आशुतोष मेहता एवं सोनल मेहता के सुपुत्र हैं। वर्तमान में परिवार सहित दुर्ग में निवासरत हैं। डुग्गू ने कभी औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं ली, लेकिन उनकी धार्मिक शिक्षा में गहरी रुचि और अभूतपूर्व ज्ञान देखकर सभी अचंभित हैं।
अल्पायु में अद्वितीय ज्ञान
डुग्गू ने जैन धर्म के 45 आगमों में से 22 आगम, चार कर्म ग्रंथों के 2,000 सूत्र, संस्कृत श्लोक, प्राचीन स्तवन और पतिक्रमण विधियाँ कंठस्थ कर ली हैं। इतनी कम उम्र में इस स्तर की धार्मिक साधना को देखकर समाज आध्यात्मिक चमत्कार की संज्ञा दे रहा है।
अरुण वोरा ने डुग्गू के माता-पिता को भी संस्कारों के इस महान दर्शन के लिए बधाई दी और कहा कि यह निर्णय परिवार के आध्यात्मिक वातावरण और समर्पण का प्रतिबिंब है।
इस गरिमामय आयोजन ने दुर्ग नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया और बालक डुग्गू का संयम पथ चुनना सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।














