पानी की बोतल बेचने में की मनमानी, अब दुकानदार को भरना पड़ेगा ₹7 लाख का जुर्माना

आंध्र प्रदेश। मंदिर में श्रद्धालु से पानी की बोतल के लिए महज 7 रुपये अधिक वसूलना एक दुकानदार को बेहद महंगा पड़ गया। MRP से ज्यादा कीमत वसूलने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए दुकानदार पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने अतिरिक्त वसूली की रकम लौटाने के साथ श्रद्धालु को मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
मामला आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले के पीठापुरम स्थित प्रसिद्ध अन्नावरम मंदिर का है। यहां दर्शन के लिए पहुंचे एक श्रद्धालु ने मंदिर परिसर की दुकान से पानी की बोतल खरीदी। बोतल पर MRP 18 रुपये दर्ज थी, लेकिन दुकानदार ने श्रद्धालु से 25 रुपये वसूल लिए। यानी निर्धारित कीमत से 7 रुपये अधिक लिए गए।
18 रुपये की बोतल के लिए लिए 25 रुपये
जानकारी के अनुसार, पीठापुरम निवासी भक्त डी. वेंकटेश्वर राव 22 फरवरी को अन्नावरम मंदिर पहुंचे थे। सत्यगिरी पहाड़ी पर स्थित ‘सत्यदेव फैंसी, कोकोनट्स एंड कूल ड्रिंक्स’ दुकान से उन्होंने पानी की बोतल खरीदी। बोतल की MRP 18 रुपये थी, लेकिन दुकानदार ने इसके लिए 25 रुपये लिए।
अतिरिक्त पैसे लिए जाने पर श्रद्धालु ने दुकानदार से सवाल किया, लेकिन जब दुकानदार ने रकम वापस नहीं की तो उन्होंने मामले की शिकायत मंदिर अधिकारियों से की।
मंदिर अधिकारियों से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
श्रद्धालु ने कथित तौर पर सबूत के साथ व्हाट्सऐप के जरिए अन्नावरम मंदिर के अधिकारियों को शिकायत भेजी। हालांकि, शिकायत के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने काकीनाडा डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन का रुख किया।
आयोग ने सुनवाई के बाद सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई और जांच के बाद उपभोक्ता आयोग ने माना कि दुकानदार ने पानी की बोतल पर निर्धारित MRP से अधिक रकम वसूली थी। इसके बाद आयोग अध्यक्ष चौ. रघुपति वसंत कुमार और सदस्य चक्का सुशी तथा चगंती नागेश्वर राव ने दुकानदार के खिलाफ आदेश जारी किया।
आदेश के मुताबिक दुकानदार को:
- ₹7 — अतिरिक्त वसूली की रकम वापस करनी होगी।
- ₹10,000 — मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर देने होंगे।
- ₹5,000 — मुकदमे के खर्च के रूप में चुकाने होंगे।
- ₹7 लाख — कंज्यूमर वेलफेयर फंड में जमा करने होंगे।
45 दिन में करना होगा भुगतान
उपभोक्ता आयोग ने दुकानदार को आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर पूरी रकम का भुगतान करने का निर्देश दिया है। समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यानी ₹7 की अतिरिक्त वसूली से शुरू हुआ विवाद अब ₹7 लाख के जुर्माने तक पहुंच गया। आयोग के इस फैसले से तय कीमत से अधिक वसूली करने वाले दुकानदारों को कड़ा संदेश मिलने की उम्मीद है।















