
दुर्ग : दुर्ग जिले में विवेचकों द्वारा जांच के दौरान होने वाली त्रुटियों को कम करने और मामलों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से E-साक्ष्य एवं एन.डी.पी.एस. एक्ट से संबंधित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 17 जनवरी 2026 को पुरानी पुलिस लाइन, दुर्ग स्थित प्रशासनिक भवन के “दधीचि प्रशिक्षण हॉल” में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल (भापुसे) ने पुलिस अधिकारी एवं विवेचकों को एनडीपीएस एक्ट के तहत की जाने वाली कार्रवाई के महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने नशीली टैबलेट एवं कैप्सूल से जुड़े मामलों में सही प्रक्रिया अपनाने, धारा 50 के अंतर्गत कार्यवाही, व्यक्तिगत तलाशी के दौरान मौके पर ही स्पष्ट एवं त्रुटिरहित दस्तावेज तैयार करने तथा ओवरराइटिंग से बचने पर विशेष जोर दिया।

एसएसपी ने बताया कि सैंपलिंग की कार्रवाई के बाद जप्तशुदा मादक पदार्थ या दवाइयों को तत्काल एफएसएल भेजना, संपत्ति पत्रक में सही तरीके से सील लगाना तथा धारा 42 के तहत मुखबिर सूचना का पंचनामा तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा धारा 50, 52-ए के अंतर्गत इन्वेस्ट्री की प्रक्रिया, धारा 55 के तहत जप्त माल को सुरक्षित रखने से लेकर एफएसएल भेजने तक की चेन ऑफ कस्टडी और धारा 57 के अंतर्गत संपूर्ण कार्यवाही की सूचना देने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि एनडीपीएस मामलों में यदि एक से अधिक आरोपी हों तो धारा 29 के तहत साजिश की कार्रवाई करना जरूरी है। साथ ही आगजनी की घटनाओं में क्षतिग्रस्त संपत्ति का विवरण, मर्ग जांच में परिस्थितिजन्य कारणों का स्पष्ट उल्लेख, आदतन अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई तथा मामलों में आरोपी को सजा दिलाने के उद्देश्य से अंत से अंत तक सुदृढ़ विवेचना करने पर बल दिया गया। इसके अलावा वाहनों के विरुद्ध अधिक से अधिक चालानी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उप पुलिस अधीक्षक (लाइन) दुर्ग चंद्र प्रकाश तिवारी, रक्षित निरीक्षक नीलकंठ वर्मा सहित जिले के लगभग 75 पुलिस अधिकारी एवं विवेचक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाकर अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।














