ब्रेकिंग
कर्ज चुकाने के लिए रची ऑनलाइन ठगी की साजिश, घर छोड़ने का झांसा देकर खाते से उड़ाए 45 हजार रुपये; दो ... डबरापारा में धारदार हथियार लेकर लोगों को धमका रहा था युवक, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा महादेव सट्टा ऐप मामले में बड़ा एक्शन! मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, CBI लेकर पहुंची... बेटे को बिना लाइसेंस बाइक देना पिता को पड़ा भारी, सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद पिता-पुत्र दोनों... सेवानिवृत्ति के दिन ही कर्मचारियों को PPO एवं पेंशन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग:- छत्तीसगढ़... दीपावली से पहले बाजार क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने अभियान दुर्ग में एक करोड़ की चोरी का सनसनीखेज खुलासा, अंतरराज्यीय गिरोह के 9 सदस्य गिरफ्तार; 47.64 लाख नकद ... अहिवारा विधायक डोमन लाल कोर्शेवाड़ा के निधन पर छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन ने जताया गहरा शोक, मातृ शक्... जमीन खरीदने के नाम पर लाखों की ठगी, रजिस्ट्री के बाद खुला ऐसा राज कि उड़ गए होश आरोग्य भारती छत्तीसगढ़ में प्रतिमा सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी, सरगुजा में हर्ष का माहौल
दुर्ग

दुर्ग में ‘पुष्पा’ का आतंक: वन विभाग की लापरवाही से पर्यावरण को भारी नुकसान

दुर्ग। फ़िल्म ‘पुष्पा’ का मशहूर डायलॉग “पुष्पा झुकेगा नहीं साला” तो आपने सुना होगा, लेकिन दुर्ग जिले में हकीकत का ‘पुष्पा’ कानून और प्रशासन को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है। जिले के उतई क्षेत्र में प्रतिबंधित अर्जुन (कहुआ) वृक्षों की अवैध कटाई और तस्करी का खेल वर्षों से जारी है।

डूमरडीह, गाढ़ाडीह, छाटा, गनियारी और छावनी चौक जैसे इलाकों में संचालित आरा मिलें इस अवैध धंधे का केंद्र बनी हुई हैं। हरे-भरे वृक्षों की कटाई कर इन्हें लकड़ी के गोलों में तब्दील किया जाता है। शिकायतें मिलने के बावजूद वन विभाग महज औपचारिक जांच कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।

टीपी बना ढाल, अधिकारी बने मूकदर्शक
वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचने पर ट्रांजिट परमिट (टीपी) के दस्तावेज देखकर ही संतुष्ट हो जाते हैं। वे कटे हुए वृक्षों की गीली लकड़ी और अन्य जिलों या राज्यों से आई सूखी लकड़ी के अंतर की जांच भी नहीं करते। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।

सुबह-शाम तस्करी के वाहन सक्रिय
प्रतिबंधित लकड़ियों से लदे वाहन (407 गाड़ियां) सुबह 4 बजे से 9 बजे तक और शाम के अंधेरे में इन आरा मिलों तक पहुंचते हैं। लेकिन न तो वन विभाग और न ही राजस्व विभाग के अधिकारी इन पर कोई कार्रवाई करते हैं।

मोटी रकम के बदले मिली सुरक्षा?
स्थानीय लोगों का दावा है कि यह ‘पुष्पा’ अधिकारियों को मोटी रकम देकर अपने अवैध धंधे को सुरक्षित चला रहा है। पाटन वन परिक्षेत्र में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई अब आम बात हो चुकी है। पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान के साथ ही शासन को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

क्या जागेगा वन विभाग?
प्रश्न यह उठता है कि आखिर कब वन विभाग इस अवैध गतिविधि पर कार्रवाई करेगा? क्या पर्यावरण को बर्बाद करने वाले इस ‘पुष्पा’ पर लगाम लगेगी, या वन विभाग और राजस्व विभाग की यह चुप्पी यूं ही जारी रहेगी?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button