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छत्तीसगढ़

जिले के जलाशयों से बढ़ रही सिंचाई क्षमता-किसानों को मिल रहा लाभ

संवाददाता, सौरभ साहू :-

सूरजपुर  | कलेक्टर एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न जलाशयों के जीर्णोद्धार से कृषकों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल रही है। जलाशयों की क्षमता में हुई वृद्धि से क्षेत्र के कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। बृजेश्वरसागर जलाशय योजना, वर्ष 1980 में ग्राम कुसमुसी (विकासखंड भैयाथान) में निर्मित की गई थी। 990 मीटर लंबे इस बांध की कैचमेंट एरिया 3.5 वर्ग मील है। नहरों की कुल लंबाई 7,530 मीटर है। उपयोगी जल भराव क्षमता 1.045 मि.घ.मी. तथा Culturable CommandArea 454 हेक्टेयर है। पूर्व में इस जलाशय से 90 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, जो जीर्णाेद्धार के बाद बढ़कर 258 हेक्टेयर हो गई है।

डुमरिया जलाशय योजना, वर्ष 1989 में ग्राम डुमरिया में निर्मित की गई थी। 480 मीटर लंबे इस बांध की कैचमेंट एरिया 1.76 वर्ग मील और जल भराव क्षमता 0.595 मि.घ.मी. है। पहले इस योजना से मात्र 30 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, जो अब बढ़कर 160 हेक्टेयर हो गई है। इससे ग्राम डुमरिया, बंसीपुर एवं करोंधा के कृषक लाभान्वित हो रहे हैं।

पीढ़ा जलाशय योजना, वर्ष 1987 में ग्राम सिन्दूरी (विकासखण्ड सूरजपुर) में निर्मित की गई थी। 840 मीटर लंबे इस बांध की उपयोगी जल भराव क्षमता 0.623 मि.घ.मी. है। पूर्व में 65 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, जो अब 95 हेक्टेयर तक बढ़ गई है। इससे ग्राम पीढ़ा के किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

चन्दरपुर जलाशय योजना, वर्ष 1980 में ग्राम चन्दरपुर (विकासखंड भैयाथान) में निर्मित की गई थी। 930 मीटर लंबे इस बांध की कैचमेंट एरिया 1.02 वर्ग मील तथा जल भराव क्षमता 0.568 मि.घ.मी. है। पहले जहां केवल 42 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, वहीं जीर्णाेद्धार के बाद यह क्षमता बढ़कर 160 हेक्टेयर हो गई है।

इन जलाशयों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों से न केवल सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की संभावनाएं बढ़ी हैं। प्रशासन द्वारा जिले के अन्य जलाशयों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी कार्यवाही की जा रही है, जिससे कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

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