युक्तियुक्तकरण को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षक संघ आमने-सामने, 20 मई को मंत्रालय में करेंगे विरोध प्रदर्शन

दुर्ग। प्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही युक्तियुक्तकरण(Rationalisation) नीति को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन और अन्य शिक्षक संगठनों ने इसे शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ बताते हुए विरोध की चेतावनी दी है। शिक्षकों का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल शिक्षकों के हितों को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि शासकीय स्कूलों को भी कमजोर कर रही है।
एक झटके में खत्म किए गए 43,849 पद
टीचर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह साहू और प्रांतीय संगठन मंत्री जयंत यादव ने बताया कि वर्ष 2008 के सेटअप के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 1 प्रधान पाठक और 2 शिक्षक (1+2) तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 1 प्रधान पाठक और 4 शिक्षक (1+4) का प्रावधान था। लेकिन युक्तियुक्तकरण में इसे घटाकर क्रमशः 1+1 और 1+3 कर दिया गया है। इससे प्रदेश भर में 43,849 शिक्षकीय पद समाप्त कर दिए गए हैं, जो अब ‘अतिशेष’ घोषित किए जा रहे हैं।
शिक्षकों पर अतिशेष का ठप्पा, जिम्मेदार कौन?
संघ का आरोप है कि विभाग कागजी आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों को कसौटी पर कसता है, लेकिन स्थानांतरण और पदोन्नति के समय नियमों को तोड़कर ‘जहां पाओ, वहां पोस्टिंग’ की नीति अपनाता है, जिससे शिक्षकों की अधिकता कुछ स्कूलों में हो जाती है। अतिशेष की स्थिति के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है।
दो शिक्षक कैसे पढ़ाएंगे 18 पीरियड?
संघ ने सवाल उठाया है कि प्राथमिक स्कूलों में 1 से 5वीं तक की कक्षाओं के लिए कम से कम 5 शिक्षकों की आवश्यकता होती है, ताकि 18 पीरियड पढ़ाए जा सकें। यदि केवल दो शिक्षक होंगे तो क्या एक दिन में 9 पीरियड पढ़ाए जाएंगे? इससे शिक्षा की गुणवत्ता गिरेगी और शासकीय स्कूलों से छात्र निजी स्कूलों की ओर रुख करेंगे।
रिक्त पदों की अनदेखी, बेरोजगारों के साथ अन्याय
31 जनवरी 2025 की स्थिति के अनुसार राज्य में कुल 43,243 शिक्षक पद रिक्त हैं। इनमें सहायक शिक्षक के 33,178, शिक्षक के 5,442 और व्याख्याता के 4,623 पद शामिल हैं। बावजूद इसके सरकार योग्य प्रशिक्षित बेरोजगारों की भर्ती नहीं कर रही है। संघ ने इसे डीएड, बीएड और टेट पास युवाओं के साथ अन्याय बताया है।
शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय स्कूलों की स्थिति गंभीर
शिक्षक नेताओं ने बताया कि प्रदेश में अब भी 212 प्राथमिक शालाएं शिक्षक विहीन हैं, जबकि 6,872 प्राथमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही हैं। 48 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है और 255 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं। ऐसे में युक्तियुक्तकरण की नीति सवालों के घेरे में है।
ड्रॉप आउट के लिए युक्तियुक्तकरण जिम्मेदार नहीं
संघ ने कहा कि ड्रॉप आउट के पीछे पालकों की बेरुखी, पलायन, और स्किल एजुकेशन की कमी जैसे कारण प्रमुख हैं। विभाग को इसके मूल कारणों को समझना चाहिए, न कि शिक्षकों को दोष देना चाहिए।
20 मई को होगा विरोध प्रदर्शन
प्रदेश भर के शिक्षक संगठनों ने युक्तियुक्तकरण का विरोध करते हुए 20 मई 2025 को मंत्रालय (महानदी भवन) परिसर में एकजुट होकर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस विरोध के दौरान शिक्षक संगठन निम्न मांगों को लेकर दबाव बनाएंगे:
युक्तियुक्तकरण की नीति को रद्द किया जाए
पात्र शिक्षकों को एरियर्स सहित क्रमोन्नति वेतनमान दिया जाए
पूर्व सेवा को गणना में जोड़ते हुए पेंशन और अन्य लाभ दिए जाएं
प्राचार्य और व्याख्याता पदोन्नति में बीएड की अनिवार्यता समाप्त की जाए
संयुक्त मंच तैयार, एकजुट होंगे शिक्षक
14 मई को हुई एक बैठक में सभी शिक्षक संगठनों ने साझा मंच तैयार कर युक्तियुक्तकरण का विरोध करने और शिक्षकों के अधिकारों के लिए लड़ाई तेज करने का ऐलान किया है। अब सबकी नजरें 20 मई के विरोध प्रदर्शन पर टिकी हैं, जहां शिक्षकों की एकता सरकार की शिक्षा नीति पर बड़ा दबाव बना सकती है।














