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राजनांदगांव

पिता की 11 साल की लड़ाई रंग लाई, बेटे के हत्यारों को हाईकोर्ट से उम्रकैद

राजनांदगांव। इच्छा शक्ति हो तो किसी भी असंभव कार्य को संभव किया जा सकता है। वातावरण के अनुकूल उसे अपना बनाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है शहर की सेवानिवृत शिक्षिका डॉ. पुष्पा सिंह ने। दरअसल उन्होंने अपने छत पर बिना किसी जैविक या घर की रासायनिक खाद ही लौकियों की फसल तैयार कर दिखाया है। उनके छत पर तैयार हो रही लौकियों की फसल कई मायनों में खास है

ओंकारेश्वर से लौकी लाकर राजनांदगांव में इसका बीज तैयार किया देवांगन, राजेश मित्रा, दुर्गेश देवांगन व राजकुमार सेन से विवाद हुआ था। पुलिस ने 3 जनवरी को आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात में प्रयुक्त बेस बॉल, चाकू एवं अन्य हथियार, खून से सना कपड़ा एवं अन्य सामान जब्त किया था। आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में धारा 302 के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट में कोई चश्मदीद गवाह नहीं आने से अदालत ने चारों आरोपियों को बरी कर दिया था।

मानव रक्त की पुष्टि

मृतक मनोज मिश्रा के पिता प्रभाशंकर मिश्रा ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। अपील में बताया गया कि आरोपी अनिल देवांगन से चाकू और राजेश मित्रा से बेसबाल का बल्ला बरामद हुआ था। एफएसएल रिपोर्ट में पाया गया है कि इसमें मानव रक्त लगा हुआ था। गवाहों ने हथियारों की जब्ती अपने सामने होने की पुष्टि की। यह भी गवाहों ने बोला है कि हमारे सामने इन लोगों ने यह बात कही थी कि हमने मारा है। घटना का एक चश्मदीद गवाह भी था, इस पर ट्रायल कोर्ट ने खास ध्यान नहीं दिया।

दो के खिलाफ नहीं मिला सबूत

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि प्रत्यक्षदर्शी अजय ने स्पष्ट रूप से कहा कि अनिल देवांगन एवं राजेश मित्रा ने मृतक कीर्ति चौबे एवं मनोज मिश्रा को बेसबाल बल्ला एवं चाकू से मारा है। हाईकोर्ट ने उसके बयान को स्वीकार करते हुए आरोपी अनिल देवांगन एवं राजेश मित्रा को धारा 302 में आजीवन कारावास एवं एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को सजा भुगतने के लिए न्यायालय में सरेंडर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दो आरोपियों दुर्गेश देवांगन एव राजकुमार सेन के खिलाफ सबूत नहीं होने पर दोनों को बरी करने के आदेश को बरकरार रखा है।

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