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सड़कों और पुलों से बदल रही तस्वीर, दूरस्थ गांव मुख्य धारा से जुड़ रहे

रायपुर : सड़कों और पुलों के निर्माण के बाद विकास व समृद्धि के रास्ते अब साफ नजर आने लगे हैं। सरकार ने अंदरूनी और दूरस्थ इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर सड़क और पुल-पुलियों के निर्माण को मंजूरी दी है। इससे जिन इलाकों में पहले आवागमन कठिन था, वहां अब सालभर संपर्क बना हुआ है। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हुई है और विकास कार्यों को नई गति मिली है।

पिछले दो वर्षों में कांकेर जिले में 61 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से 15 पुलों के काम पूर्ण किए गए हैं। इन पुलों के बनने से जिले के लगभग 100 गांवों और करीब 80 हजार आबादी का सीधा और बारहमासी संपर्क ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से हो गया है। अब ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यटन जैसी सुविधाओं तक पहुंचने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती। सरकारी योजनाएं भी तेजी से गांवों तक पहुंच रही हैं।

आतुरबेड़ा–भैसगांव–निन्ना मार्ग पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मेंढ़की नदी पर बना उच्च स्तरीय पुल इस बदलाव का बड़ा उदाहरण है। इस पुल के कारण सुदूरांचल के लोगों का आवागमन सुगम हुआ है और प्रशासनिक गतिविधियों को भी मजबूती मिली है। सड़क और पुल नेटवर्क के विस्तार से न सिर्फ विकास कार्य तेज हुए हैं, बल्कि माओवाद प्रभावित रहे इलाकों में शासन की पकड़ भी मजबूत हुई है।

सड़कों और पुलों के नेटवर्क लगातार मजबूत किए जा रहे हैं। कांकेर जिले के कोने-कोने को राज्य मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ने पिछले दो वर्षों में 85 करोड़ रुपये की लागत से 9 नए वृहद पुलों को स्वीकृति दी गई है। लोक निर्माण विभाग के सेतु निर्माण संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री राजेंद्र सोनकर ने बताया कि बासनवाही–टांहकापार मार्ग पर महानदी पर 28 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत पुल हजारों ग्रामीणों की सुविधा और पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। सोनपुर–मरोड़ा मार्ग पर बेचाघाट में कोटरी नदी पर 15 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से पुल निर्माण का कार्य प्रगति पर है। इसके पूरा होने से माओवाद प्रभावित माड़ क्षेत्र का सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।

राज्य शासन दूरस्थ अंचलों तक मजबूत सड़कों और पुलों के माध्यम से लोगों की सहूलियतें बढ़ाने तथा दुर्गम एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचाने प्रतिबद्धता से काम कर रही है। कांकेर में बन रहे ये पुल सिर्फ कांक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा की ओर बढ़ते कदम हैं। इनके पूरा होते ही जिले के सुदूरवर्ती गांवों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से लाभ मिलेगा। इससे विकास की रफ्तार और तेज होगी।

 

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