
रायपुर। पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में आयोजित शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों से स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर तीखे सवाल किए। बैठक में संभागीय संयुक्त संचालक, जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला मिशन समन्वयक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत में ही मंत्री ने अधिकारियों से कहा, “मोबाइल से रिकॉर्डिंग बंद करिए, मैं भाषण देने नहीं आया हूं।”
विभिन्न जिलों के DEO से प्रबंधन, मॉनिटरिंग और समन्वय को लेकर जवाब मांगे गए। अधिकारियों के जवाब से असंतुष्ट मंत्री ने स्कूलों की जमीनी स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई जगह शिक्षक और प्राचार्य स्कूलों को अपना नहीं मानते और केवल वेतन लेने तक सीमित रहते हैं। स्कूलों की जर्जर स्थिति, बच्चों की अनुपस्थिति और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की बड़ी चुनौती बताया।
प्राचार्यों के केबिन पर भी मंत्री ने जताई नाराजगी
शिक्षा मंत्री ने अपने मैदानी निरीक्षणों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ स्कूलों में प्राचार्यों ने बड़े और बेहतर कमरों को अपने निजी केबिन के लिए इस्तेमाल कर रखा है, जबकि स्कूल की पुरानी इमारतों और अन्य हिस्सों की स्थिति खराब है। उन्होंने गनियारी और तरीघाट के सरकारी स्कूलों का उदाहरण देते हुए स्कूल परिसरों की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाए।
मंत्री ने अधिकारियों और प्राचार्यों को कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करने और बच्चों की पढ़ाई व सुविधाओं पर ध्यान देने के निर्देश दिए।
शिक्षकों के आंदोलन पर भी सख्त टिप्पणी
बैठक में शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में होने वाले आंदोलनों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन खड़े किए जाते हैं और बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाता है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि स्कूलों में अनुशासन, पढ़ाई और बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी जाए।
यूट्यूबर्स और अनधिकृत मीडियाकर्मियों की एंट्री पर निर्देश
शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में यूट्यूबर्स और अनधिकृत मीडियाकर्मियों की अनावश्यक आवाजाही को लेकर भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना वजह किसी को स्कूल परिसर में घूमने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। स्कूलों की व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसका विशेष ध्यान रखने को कहा गया।
शिक्षकों की कमी पर यूट्यूब और पीएम ई-विद्या का सहारा
बैठक में शिक्षकों की कमी को दूर करने तक वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने निर्देश दिया कि नई भर्ती होने तक यूट्यूब और पीएम ई-विद्या चैनलों के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी जाए, ताकि शिक्षक की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
छात्राओं के लिए सेल्फ डिफेंस और स्कूल बैंड अनिवार्य
बैठक में छात्राओं की सुरक्षा और विद्यार्थियों की पाठ्यसहगामी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। सभी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में छात्राओं के लिए सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग अनिवार्य करने तथा पुलिस बैंड की मदद से स्कूल बैंड दल गठित करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा गुजरात मॉडल का उदाहरण देते हुए स्कूलों में बच्चों के बीच संस्कार और अनुशासन विकसित करने के लिए ‘भोजन मंत्र’ को अनिवार्य करने पर भी जोर दिया गया।
पांच साल बाद सरकारी स्कूलों में बढ़ी छात्र संख्या
समीक्षा बैठक में शिक्षा विभाग की एक उपलब्धि पर संतोष भी जताया गया। बताया गया कि बीते पांच वर्षों में पहली बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस उपलब्धि के लिए शिक्षकों को बधाई दी गई।
शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों और शिक्षकों से कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों का भरोसा बढ़ाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, नियमित मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और विद्यार्थियों के भविष्य पर लगातार फोकस करना जरूरी है।














