वन संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, रोजगार, वन्यजीव संरक्षण और तकनीक आधारित वन प्रबंधन पर जोर

नवा रायपुर, अटल नगर। वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने आज छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में विभागीय गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए वन संरक्षण का मतलब केवल जंगलों की सुरक्षा नहीं, बल्कि वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार तथा वन्यजीव संरक्षण भी है।
किसान वृक्ष मित्र योजना से किसानों की आय के साथ बढ़ी हरियाली
मंत्री कश्यप ने बताया कि सरकार ने वृक्षारोपण को किसानों की आय से जोड़ने के लिए किसान वृक्ष मित्र योजना शुरू की है। योजना के तहत पात्र नागरिकों को 5 एकड़ तक की भूमि पर 100 प्रतिशत वित्तीय अनुदान और 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनवासी परिवारों को राहत
मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिसके एवज में 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वहीं 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया।
12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई है, जबकि वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका वितरण प्रस्तावित है। समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज की खरीदी की गई, जिसके लिए संग्राहकों को 16.66 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया।
राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना के तहत 1,862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,533 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में 12.07 करोड़ रुपये दिए गए। वर्ष 2026 में अबूझमाड़ में 13 नए तेंदूपत्ता फड़ भी शुरू किए गए हैं।
70 हजार से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार का अवसर
मंत्री कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और पीएम जनमन योजना के तहत लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के 70 हजार से ज्यादा सदस्य लाभान्वित हुए हैं। वन धन केंद्रों से जुड़ी महिला समूहों को 5 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन दिया गया है।
वन धन केंद्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पाद तैयार किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य 4.42 करोड़ रुपये रहा। वहीं कई जिलों में महिला समूहों द्वारा खस, सिंदूरी और सतावर जैसी प्रजातियों का रोपण कर आजीविका के नए अवसर तैयार किए गए हैं।
बस्तर में शांति के साथ रोजगार और विकास की शुरुआत
केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का असर अब विकास कार्यों पर भी दिखाई दे रहा है। वन विभाग ने दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में इमारती लकड़ी और बांस विदोहन के कार्य फिर शुरू करने की तैयारी की है।
इन कार्यों से अनुमानित 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार का सृजन होगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ पलायन कम करने और लोगों के जल, जंगल, जमीन तथा बस्तर की संस्कृति से जुड़ाव को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
वन क्षेत्रों में सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी पर जोर
मंत्री ने कहा कि वन संरक्षण के साथ सरकार वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी काम कर रही है। पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर वनभूमि और 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमति दी गई है।
वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1,300 से 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद अनुमति जारी की गई। वहीं बीएसएनएल के 62 में से 59 टावरों को रिकॉर्ड 70 दिनों में अनुमति प्रदान की गई।
प्रदेश में बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35
वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियां गिनाते हुए मंत्री ने बताया कि प्रदेश में बाघों की संख्या वर्ष 2022 में 18 थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। उन्होंने इसे 94 प्रतिशत की वृद्धि बताया।
उन्होंने कहा कि 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। एनटीसीए ने बांधवगढ़ से तीन बाघिनों के स्थानांतरण की अनुमति दी है। इसके लिए एनक्लोजर और पेट्रोलिंग कैंप तैयार किए जा चुके हैं तथा बरसात के बाद स्थानांतरण प्रस्तावित है।
बारनवापारा में कृष्ण मृगों की संख्या 200 के पार
मंत्री कश्यप ने बताया कि बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2026 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की थी।
इंद्रावती क्षेत्र में राज्य पशु वन भैंसों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पहाड़ी मैना की संख्या 800 से 900 के बीच दर्ज की गई है। ‘मैना मित्र’ योजना के तहत 250 घोंसलों की पहचान की गई है। अचानकमार के औरापानी में वल्चर सेफ जोन विकसित किया गया है।
मानव-हाथी द्वंद कम करने तकनीक और जनभागीदारी
मंत्री ने बताया कि मानव-हाथी द्वंद को कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से तकनीक एवं सामुदायिक सहभागिता को जोड़ा गया है। हाथियों से होने वाली जनहानि में वर्षवार कमी आई है।
प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। 12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस के अवसर पर दरभा में ‘गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया। इस पहल को राज्य स्तरीय सुशासन पुरस्कार भी मिला है।
ईको-टूरिज्म से स्थानीय युवाओं को रोजगार
केदार कश्यप ने बताया कि प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र विकसित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र पूरी तरह स्वावलंबी हो चुके हैं। बस्तर के धुड़मारास में सामुदायिक पर्यटन के माध्यम से 40 प्रत्यक्ष और 20 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार हुए हैं।
महासमुंद के शिशुपाल इको ट्रेल को 45 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है। वहीं कवर्धा सफारी मॉडल में 35 किलोमीटर लंबा नया सफारी मार्ग विकसित किया गया है।
बस्तर की संस्कृति और घोटुल संरक्षण पर काम
मंत्री ने कहा कि बस्तर की संस्कृति जंगल और प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। इसलिए जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। पिछले ढाई वर्षों में 19.05 करोड़ रुपये खर्च कर वन क्षेत्रों में 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है। नारायणपुर के ग्राम गढ़बेंगाल में बस्तर की पारंपरिक सांस्कृतिक संस्था ‘घोटुल’ के संरक्षण की दिशा में भी काम किया गया है।
कांगेर घाटी को मिली वैश्विक पहचान
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यह क्षेत्र गुफाओं, तीरथगढ़ जलप्रपात और समृद्ध जैव-विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
पहला रामसर साइट और वेटलैंड संरक्षण
मंत्री ने बताया कि कोपरा जलाशय, बिलासपुर को छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। विजन@2047 के तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश में 20 रामसर साइट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली 11,096 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड ट्रूथिंग और बाउंड्री डिमार्केशन का कार्य पूरा किया गया है। प्रदेश में 500 से अधिक वेटलैंड मित्र कार्यरत हैं।
डिजिटल वन प्रशासन से पारदर्शिता
केदार कश्यप ने बताया कि वन विभाग की भुगतान प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल किया गया है और इसे भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर तथा ई-कोष प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक 209 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान हो चुका है।
उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस को मुख्यालय से लेकर सभी वनमंडल स्तर तक 100 प्रतिशत लागू किया गया है। वहीं वन अग्नि दुर्घटनाओं की निगरानी के लिए आधुनिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम संचालित है। इससे नियर रियल टाइम अलर्ट जारी हो रहे हैं और रिस्पॉन्स टाइम 1-2 घंटे से घटकर 5-10 मिनट तक आ गया है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वन संरक्षण, जनकल्याण, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के बेहतर समन्वय के जरिए छत्तीसगढ़ को हरित और समृद्ध राज्य बनाना है।














