छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में 60% से अधिक विद्यार्थी फेल, प्राचार्यों और शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी”

रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) के इस वर्ष के परीक्षा परिणामों ने कई जिलों में चिंता बढ़ा दी है। हालाँकि प्रदेश का ओवरऑल रिजल्ट बीते वर्षों से बेहतर रहा, लेकिन रायपुर संभाग में स्थिति संतोषजनक नहीं है।
खासतौर पर रायपुर जिला, जहां बोर्ड परीक्षा परिणामों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। रायपुर जिले का प्रदर्शन प्रदेश के 33 जिलों में 32वें स्थान पर रहा।
रायपुर संभाग में 19 मई से जिलेवार परीक्षा परिणामों की गहन समीक्षा शुरू की जाएगी। रायपुर संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा राकेश कुमार पांडेय इस समीक्षा की अगुवाई करेंगे।
वे न केवल जिलेवार, बल्कि प्रत्येक स्कूल के विषयवार परिणामों की भी समीक्षा करेंगे। इस कार्यवाही के दौरान संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
रायपुर जिले में हालात चिंताजनक
रायपुर जिले में इस वर्ष 10वीं के परीक्षा परिणाम में मात्र 66.24% विद्यार्थी ही सफल हुए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 71.64% था। वहीं, 12वीं में इस वर्ष 79.94% बच्चे उत्तीर्ण हुए, जो बीते वर्ष के 83.19% से कम है।
अन्य जिलों में भी परिणामों में गिरावट देखी गई है, पर रायपुर जिले का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा।
धमतरी जिले में 10वीं 72.01% और 12वीं 81.56%
गरियाबंद जिले में 10वीं 80.70% और 12वीं 90.17%
बलौदाबाजार में 10वीं 81.69% और 12वीं 86.51%
महासमुंद में 10वीं 78.33% और 12वीं 84.08% परिणाम रहा।
मुख्यमंत्री के तेवर सख्त, कार्रवाई तय
राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने का संकेत दिया है। हाल ही में महासमुंद जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को हटाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, रायपुर सहित अन्य जिलों के शिक्षा अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
संभागीय संचालक राकेश पांडेय ने कहा है कि परिणामों की समीक्षा के बाद लापरवाह प्राचार्य और शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार स्कूलवार और विषयवार परिणामों का विश्लेषण कर कमजोर कड़ी की पहचान की जाएगी।
समीक्षा का शेड्यूल इस प्रकार है:
19 मई – रायपुर
21 मई – धमतरी
23 मई – गरियाबंद
28 मई – बलौदाबाजार
30 मई – महासमुंद
राकेश पांडेय ने कहा कि जिन स्कूलों में अतिशेष शिक्षक और संसाधनों के बावजूद खराब परिणाम आए हैं, वहां विशेष ध्यान दिया जाएगा।














