ब्रेकिंग
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का जिला अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक मार्च, मांगों को लेकर सरकार के नाम सौंपा ज्ञ... साड़ी की जिद बनी मौत की वजह! पत्नी ने पति को उतारा मौत के घाट CM साय से लघु उद्योग भारती की मुलाकात, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर की तैयारियों पर हुई अहम चर्चा Sai Cabinet Meeting Today: आज साय सरकार ले सकती है बड़े फैसले, किसानों के लिए हो सकता है बड़ा ऐलान लोक कर्म विभाग की समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की प्रगति पर सख्त नजर, समय-सीमा में कार्य पूर्ण करन... भव्य सावन मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, सांस्कृतिक समिति की बैठक में बनी कार्ययोजना, छत्तीसगढ़ में मेहरबान हुआ मानसून, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश; मौसम विभाग का ऑरेंज-येलो अलर्ट दुर्ग में अंधे कत्ल का खुलासा: महिला की हत्या के मामले में 2 आरोपी गिरफ्तार, दुष्कर्म की कोशिश नाकाम... सी.जी. सुपरफास्ट न्यूज़ के संपादक सुरेश गुप्ता ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को दी जन्मदिन की शुभकामना... राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव 2026-27 का भव्य आयोजन, नए शिक्षा सत्र का हुआ शुभारंभ
छत्तीसगढ़

BREAKING : हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे का निधन, अस्पताल में ली अंतिम सांस

रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय हास्य कवि और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. सुरेन्द्र दुबे का आज आकस्मिक निधन हो गया। 72 वर्षीय कवि ने रायपुर स्थित ACI अस्पताल में अंतिम सांस ली। जानकारी के मुताबिक, तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें हार्ट अटैक आया और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

डॉ. सुरेन्द्र दुबे का जन्म 8 जनवरी 1953 को बेमेतरा (दुर्ग) में हुआ था। अपनी विशिष्ट हास्य शैली और व्यंग्यात्मक रचनाओं के लिए प्रसिद्ध डॉ. दुबे ने पांच प्रमुख किताबें लिखीं और कई राष्ट्रीय मंचों एवं टेलीविजन कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

उनकी रचनात्मक प्रतिभा को कई अन्य सम्मानों से भी नवाज़ा गया — 2008 में काका हाथरसी हास्य रत्न पुरस्कार, 2012 में पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान, अट्टहास सम्मान, और अमेरिका में ‘लीडिंग पोएट ऑफ इंडिया’ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार शामिल हैं।

डॉ. दुबे ने विदेशों में भी हिंदी कविता का परचम लहराया। वर्ष 2019 में वाशिंगटन डीसी में उन्हें “हास्य शिरोमणि” सम्मान से नवाज़ा गया। उनकी साहित्यिक और अकादमिक उपलब्धियों को मान्यता देते हुए देश के तीन विश्वविद्यालयों ने उनकी रचनाओं पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की थी।

उनके निधन से हिंदी व छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत को गहरा आघात पहुंचा है। वे न केवल एक प्रसिद्ध कवि थे, बल्कि एक प्रेरणास्रोत और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के मजबूत स्तंभ भी थे

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button