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चूहा बारात बनी सियासी हथियार: मंत्रियों पर तंज, पिंजरे में चूहा सौंपकर कांग्रेस का विरोध

दुर्ग। छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के नुकसान को लेकर भाजपा सरकार द्वारा “चूहों” को जिम्मेदार ठहराए जाने के दावे ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस दावे को किसानों के साथ अन्याय और घोटाले से ध्यान भटकाने की कोशिश बताते हुए जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) ने मंगलवार को एक अनोखे और प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए सरकार पर सीधा हमला बोला।

राजीव भवन दुर्ग से कलेक्टर कार्यालय तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों, नारेबाजी और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ जुलूस निकाला। इस प्रदर्शन की खास पहचान बनी “चूहा झांकी”, जिसमें कार्यकर्ता चूहे के रूप में सजे हुए धान हाथ में लेकर नाचते-गाते नजर आए। यह दृश्य सरकार के उस दावे पर व्यंग्य था, जिसमें धान के नुकसान की जिम्मेदारी चूहों पर डाली जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों को चार जीवित चूहे प्रतीकात्मक रूप से सौंपे। इन चूहों पर छत्तीसगढ़ सरकार के 14 मंत्रियों के नाम अंकित किए गए थे। कांग्रेस का कहना था कि यदि सरकार के अनुसार धान चूहों ने खाया है, तो यही “चूहे” असली दोषी हैं और इन्हीं से जवाब लिया जाना चाहिए।

कलेक्टर कार्यालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया। नाचते हुए चूहे, नारों की गूंज और प्रतीकात्मक “मंत्री बारात” ने आम लोगों के साथ-साथ मीडिया का भी विशेष ध्यान खींचा।

जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि धान किसानों की जीवनरेखा है और “चूहा खा गया” जैसे बयान सरकार की विफलता और भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी की समय-सीमा सीमित रखकर और टोकन व्यवस्था को जानबूझकर बाधित कर किसानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे बड़ी मात्रा में धान की खरीदी नहीं हो पा रही।

प्रदेश महामंत्री राजेंद्र साहू ने सवाल उठाया कि यदि गोदामों में रखे धान को चूहे खा गए, तो वहां की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान पर सीधा हमला बताया।

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में धान घोटाले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व मंत्रियों पर कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन सीमा बढ़ाने और खरीदी अवधि में विस्तार जैसी मांगें शामिल रहीं।

कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और तेज किया जाएगा।

यह अनोखा “मुसवा प्रदर्शन” भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस के विरोध का प्रतीक बन गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।

 

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