ब्रेकिंग
अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री श्री... बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पटरीपार सिकोला भाटा सब्जी मार्केट में निगम की बड़ी कार्रवाई, नाली के ऊपर बने 35 से अधिक अवैध निर्माण... छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास
देश

छठ पूजा 2024: आज से शुरू हो रहा छठ महापर्व, नहाए खाए के साथ शुरू होगी तैयारी

पटना | बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखण्ड में छठ पूजा सबसे पवित्र और लोगों का प्रिय त्योहार माना जाता है। कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से नहाए खाए की शुरुआत होती है, और उसी दिन से छठ पूजा के व्रत की भी शुरुआत होती है। तो चलिए हम आपको पूरे विस्तार से बताते हैं, कि 2024 में नहाए खाए की शुरुआत कब हो रही है साथ ही अर्घ्य देने की शुभ तिथि और समय क्या है।

छठ पूजा का त्यौहार पूरे देश भर में खासकर उत्तर प्रदेश बिहार और झारखंड में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा की शुरुआत नहाए खाए से होती है इस साल छठ पूजा का पर्व 5 नवंबर से शुरू हो रहा है, यानी आज 5 नवंबर को सभी श्रद्धालु नहाए खाए के बाद व्रत की शुरुआत करेंगे। नहाए खाए में व्रत करने वाली महिलाएं स्नान ध्यान कर नित पूजा पाठ करती हैं, और उसके बाद कद्दू भात समेत विविध व्यंजनों को ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेती हैं। इस व्रत के संकल्प के बाद दो दिन बिना खाए छठ माता की पूजा आराधना की जाती है।

नहाए खाए के बाद सभी महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं, और अगले दिन यानी 2024 के तिथि के अनुसार 6 नवंबर को सभी महिलाएं नए मिट्टी के चूल्हे पर खीर बनाएगी। इसके बाद उसे भोग के रूप में छठी मैया को अर्पित किया जाता है। इस दिन पूजा के बाद व्रत की शुरुआत होती है।

खरना के बाद अगले दिन यानी तीसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस बार 7 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाएगा साथ ही अंतिम दिन यानी 8 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पूजा का समापन होता है।

छठ पूजा की शुभ अवसर पर सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा प्रत्युषा की विविधपूर्वक उपासना करने का विधान है। मानता है, की पूजा करने से जातक को छठी मैया की कृपा प्राप्त होती है। सनातन शास्त्रों में छठी मैया को संतानों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है, इसलिए छठ पूजा के दिन छठी मैया का पूजा करने का विशेष महत्व है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button