ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का प्रतिनिधि मंडल उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव से मिला खड़गे की टिप्पणी पर भाजपा कार्यकर्ता मनीष सिंह भंडारी ने जताई कड़ी नाराजगी, कांग्रेस पर साधा निशाना जिला पंचायत दुर्ग के सभाकक्ष में आयोजित बैठक एवं नवनियुक्त पदाधिकारियों के स्वागत का विहंगम दृश्य दीपावली की खरीदारी के लिए ओम ज्वैलर्स में उमड़ी भीड़, ओम सोनी ने बताया खास ऑफर भाजयुमो ने किया कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का पुतला दहन दुर्ग के ओम ज्वैलर्स में त्योहारी रौनक, ग्राहकों को मिल रही विशेष छूट और आकर्षक उपहार गोवर्धन पूजा पर सामान्य अवकाश की घोषणा का छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन ने किया स्वागत राज्योत्सव की तैयारियों को लेकर सक्रिय हुए कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, राज्यपाल रमेन डेका को समारो... पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति ऑल इंडिया रजिस्टर्ड छत्तीसगढ़ प्रदेश की बैठक संपन्न. भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ
बिलासपुर

डॉ. सहारे की याचिका खारिज: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को एक महीने बाद ठहराया सही

बिलासपुर। एक महीने बाद ही सही सिम्स के तत्कालीन डीन डा केके सहारे के खिलाफ राज्य शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सही ठहराया है। डा सहारे की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही पूर्व में शासन के निलंबन आदेश पर लगाई रोक को भी कोर्ट ने हटा लिया है।

बता दें कि निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए डा सहारे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने शासन के फैसले पर रोक लगा दी थी। तब सिम्स में दो-दो डीन कामकाज कर रहे थे। हाई कोर्ट के फैसले के बाद शासन की भद भी पिटी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले से अब जाकर स्वास्थ्य मंत्री व राज्य शासन को राहत मिली है।

राज्य शासन की ओर से कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने बताया कि सिम्स के तत्कालीन डीन डा सहारे के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में जांच की जा रही है। जांच में डा सहारे का रवैया असहयोगात्मक रहा है।

वे जांच दल को सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनसे जो जवाब मांगा जा रहा है वे नहीं दे रहे हैं। इससे जांच भी लगातार प्रभावित हो रहा है और अनावश्यक विलंब भी हो रहा है।

ला अफसर का यहां तक कहना था कि वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के दौरान उनका महत्वपूर्ण पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। जांच की दिशा बदलेगी और काफी हद तक जांच को प्रभावित भी कर सकते हैं। इन दोनों ही बातों से इंकार नहीं किया जा सकता।

ला अफसर की बातों और तर्कों से सहमति जताते हुए कोर्ट ने डा सहारे को जांच में सहयोग करने की हिदायत दी साथ ही इस बात को लेकर नाराजगी भी जताई कि जांच में सहयोग ना करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button