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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर, भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना की पहल का स्वागत

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार के उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान संत-महात्माओं ने राज्य के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों एवं मंत्रों को पुनः शामिल करने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

संत समाज ने कहा कि पहले विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर जैसे मंत्रों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से दूर होती गईं, लेकिन राज्य सरकार की पहल से इन्हें फिर से स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का भी आधार है। राज्य सरकार आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया और इसे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान तथा आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण निर्णय बताया।

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