
दुर्ग। साइबर जागृति अभियान के तहत दुर्ग पुलिस द्वारा पुलिस लाइन स्थित प्रशासनिक भवन के दधीचि प्रशिक्षण हॉल में एसटीएफ के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल सतर्कता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को वर्तमान समय में सामने आ रहे साइबर अपराधों के तरीकों, ऑनलाइन ठगी, संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया आधारित धोखाधड़ी और ओटीपी से होने वाली ठगी से बचाव की जानकारी दी गई। साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल शिकायत और कार्रवाई के लिए उपलब्ध तकनीकी एवं कानूनी माध्यमों के बारे में भी बताया गया।
मंत्री गजेन्द्र यादव ने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि अनजान लोगों के संदेश, फ्रेंड रिक्वेस्ट और संदिग्ध लिंक को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने ओटीपी, पिन, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा परिवार और समाज में भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने साइबर अपराधों की रोकथाम में पुलिस की तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों से लगातार अपडेट रहने और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने का निर्देश दिया।
कार्यक्रम में सभी एसटीएफ अधिकारी-कर्मचारियों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रहने और डिजिटल माध्यमों का सतर्कता से उपयोग करने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान मंत्री गजेन्द्र यादव ने पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ सामूहिक सेल्फी भी ली।
कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणिशंकर चन्द्रा ने किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक नगर हर्षित मेहर, उप पुलिस अधीक्षक (लाइन) चन्द्रप्रकाश तिवारी सहित पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और एसटीएफ के जवान मौजूद रहे।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि ओटीपी, पिन, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
“एक क्लिक सोच-समझकर, भविष्य सुरक्षित।”















