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दुर्ग

खदानों में बढ़ते हादसों पर प्रशासन सख्त, कलेक्टर ने सभी खनन पट्टाधारियों को जारी किए कड़े निर्देश

दुर्ग। जिले में पूर्व में संचालित परित्यक्त खदानों और वर्तमान में चालू खदानों में सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी के कारण आए दिन दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन को आम जनता, जनप्रतिनिधियों और मीडिया के माध्यम से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि खदानों में पानी भर जाने से बने गहरे तालाबों में लोगों और मवेशियों की डूबकर मौत हो रही है। ऐसी घटनाओं में जिला प्रशासन आपदा राहत अंतर्गत पीड़ित परिजनों को मुआवजा देता है।

इन खतरनाक परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने दुर्ग, धमधा, पाटन और भिलाई-3 के अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे खदान संचालनकर्ताओं को समुचित सुरक्षा इंतजाम करने हेतु बाध्य करें। उन्होंने कहा कि सभी चालू और परित्यक्त खदानों के चारों ओर फेसिंग/बाड़ निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जाए ताकि आम नागरिक और मवेशी दुर्घटनाग्रस्त न हों।

कलेक्टर ने बताया कि छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम-2015 के अंतर्गत खदानों के चारों ओर 7.5 मीटर चौड़ी हरित पट्टी तथा बैरियर बनाना अनिवार्य है। इसके साथ ही माइनिंग क्लोजर प्लान, बेंचेस निर्माण, बेकफिलिंग और जल संरक्षण क्षेत्र का विकास, वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धाराओं का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर मजिस्ट्रेट स्वयं हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं और खर्च की वसूली संबंधित खनन पट्टाधारी से की जाएगी।

प्रशासन की यह सख्ती जिले में खदान क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों की बहाली और भविष्य में हादसों को रोकने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

 

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