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दुर्ग यातायात पुलिस का अध्ययन: दुर्घटनाओं पर नियंत्रण में Enforcement और Engineering का प्रत्यक्ष प्रभाव

भिलाई | 23 अगस्त 2025 को Institution of Engineers (India), Bhilai Local Centre द्वारा इंजीनियर्स भवन, सिविक सेंटर, भिलाई में “Sustainable Traffic Management – Issues and Challenges” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री विजय अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संगोष्ठी में यातायात पुलिस की प्रभारी सुश्री ऋचा मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात), दुर्ग विशेषज्ञ पैनल की सदस्य के रूप में शामिल हुईं।

 

कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रस्तुतीकरण व डाटा विश्लेषण का प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि –यातायात नियमों का कड़ा प्रवर्तन (Strict Enforcement) और सड़क दुर्घटनाओं में कमी (Reduction in Road Accidents) सीधे अनुपात में जुड़े हुए हैं।

  • जनवरी से जुलाई 2024 के बीच दुर्ग जिले में 11,198 प्रकरणों पर कार्यवाही हुई थी, जबकि इसी अवधि 2025 में यह बढ़कर 20,952 हो गई।
  • बिना हेलमेट वाहन चलाना, ट्रिपल सवारी, ओवरस्पीडिंग, नशे की हालत में वाहन चलाना तथा बिना सीटबेल्ट गाड़ी चलाने जैसे उल्लंघनों पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 746 से घटकर 664 रही, घायलों की संख्या 653 से घटकर 584 और मृतकों की संख्या 213 से घटकर 190 दर्ज की गई।

इन आँकड़ों से यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि —

जितना अधिक प्रवर्तन (Enforcement) बढ़ा, दुर्घटनाओं की संख्या उतनी ही कम हुई।

यानी प्रवर्तन और सड़क दुर्घटनाओं का रिश्ता प्रत्यक्ष अनुपाती है।

सेमिनार में यह भी रेखांकित किया गया कि सड़क सुरक्षा केवल प्रवर्तन तक सीमित नहीं है। 5E Pillars — Enforcement, Engineering, Education, Emergency और Evaluation के समन्वित प्रयास से ही स्थायी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस दिशा में दुर्ग यातायात पुलिस द्वारा स्थानीय प्रशासन एवं नगर निगम के सहयोग से ब्लैक स्पॉट सुधार, सड़क प्रकाश व्यवस्था, डिवाइडर निर्माण, रंबल स्ट्रिप और साइन बोर्ड लगाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

संगोष्ठी का निष्कर्ष यह रहा कि सतत् यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा हेतु प्रवर्तन को प्राथमिक साधन के रूप में लागू करना आवश्यक है, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं में प्रत्यक्ष कमी आती है।

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