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दुर्ग

‘गुरुजी’ बिसे यादव का निधन, 73 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

दुर्ग। कभी दुर्ग की राजनीति में प्रखर और जुझारू नेता के रूप में पहचान बनाने वाले बिसे यादव का निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्हें लोग सम्मान से ‘गुरुजी’ के नाम से पुकारते थे। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे हरनाबांधा मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार होगा।

राजनीति में सफर और संघर्ष
गुरुजी बिसे यादव का राजनीतिक जीवन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे कभी प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा को चुनावी मैदान में सीधी चुनौती देने का साहस रखते थे। सन् 1989 के उपचुनाव में उन्होंने शिवसेना की टिकट से मोतीलाल वोरा के खिलाफ चुनाव लड़ा और अपनी जमानत बचाने में सफल रहे। उस दौर में दुर्ग में भाजपा का कोई खास अस्तित्व नहीं था, लेकिन यादव ने संगठन को खड़ा करने में अहम योगदान दिया।

भाजपा में योगदान और ‘गुरुजी’ की पहचान
बिसे यादव पहले भाजपा युवा मोर्चा शहर अध्यक्ष और बाद में भाजपा शहर अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने डॉ. रमन सिंह को भाजपा की सदस्यता दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। कवर्धा में ‘शनिवार डॉक्टर’ के नाम से मशहूर डॉ. सिंह को उन्होंने गोविंद सारंग के साथ मिलकर पार्टी से जोड़ा। यही वह दौर था जब भाजपा ने धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की।

कभी पांच बार पार्षद, कभी हाशिए पर
गुरुजी ने 1974 से 1979 तक नेशनल हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में सेवा दी, लेकिन राजनीति में आने के बाद उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ा और पहली बार कांग्रेस शहर अध्यक्ष रामानुजलाल यादव को हराकर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद वे पांच बार पार्षद चुने गए। हालांकि भाजपा के सत्ता में आने के बाद उन्हें राजनीतिक रूप से दरकिनार कर दिया गया और उनका जीवन एक छोटे से कमरे में सिमटकर रह गया।

हिंदूवादी सोच और अंतिम अभियान
बिसे यादव की पहचान हमेशा हिंदूवादी विचारधारा के नेता के रूप में रही। उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए अभियान शुरू किया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से यह अभियान थम गया। जीवन के अंतिम समय तक वे इस विचारधारा को आगे बढ़ाने का सपना संजोए रहे।

राजनीति में छोड़ गए अमिट छाप
एक समय था जब दुर्ग शहर में ‘गुरुजी’ की दहाड़ गूंजा करती थी और कांग्रेस के दिग्गज भी उनके नाम से खौफ खाते थे। आज भले ही वे हाशिए पर चले गए थे, लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता और सांगठनिक क्षमता को लोग लंबे समय तक याद करेंगे।

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