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छत्तीसगढ़ में बिजली हुई महंगी, घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ताओं के लिए नई दरें लागू

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में संशोधन करते हुए नई टैरिफ दरें लागू कर दी हैं। आयोग के आदेश के बाद घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को अब बिजली के लिए अधिक भुगतान करना होगा। संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं, जिससे प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर सीधा असर पड़ेगा।

घरेलू उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ

नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका प्रभाव शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के परिवारों पर पड़ेगा। सामान्य बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में अधिक बिल चुकाना होगा, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

स्थानीय निकाय कार्यालय अब घरेलू श्रेणी में

आयोग ने स्थानीय निकायों के कार्यालयों के विद्युत टैरिफ में भी बदलाव किया है। इन्हें गैर-घरेलू श्रेणी से हटाकर घरेलू श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। अब इन कार्यालयों की बिलिंग घरेलू श्रेणी के अनुसार की जाएगी।

स्ट्रीट लाइट और जल आपूर्ति टैरिफ में बदलाव

छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों में संचालित स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक जल आपूर्ति सेवाओं के बिजली टैरिफ को भी गैर-घरेलू से बदलकर घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे इन सेवाओं की बिजली लागत और बिलिंग संरचना में बदलाव आएगा।

अस्थायी कनेक्शन पर नया प्रावधान

अस्थायी घरेलू बिजली कनेक्शनों के लिए भी नया नियम लागू किया गया है। अब यदि कोई अस्थायी कनेक्शन दो वर्ष से अधिक समय तक जारी रहता है, तो उस पर सामान्य घरेलू टैरिफ लागू होगा। इसका उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और अस्थायी कनेक्शनों के लंबे उपयोग को नियंत्रित करना है।

गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को भी झटका

दुकानों, कार्यालयों, छोटे उद्योगों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बिजली दरों में 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे व्यावसायिक गतिविधियों की लागत बढ़ने की संभावना है और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालन खर्च पर असर पड़ सकता है।

मोबाइल टावरों को राहत

राज्य सरकार ने बस्तर और सरगुजा के आदिवासी क्षेत्रों में संचालित मोबाइल टावरों को ऊर्जा शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय बरकरार रखा है। यह रियायत वर्ष 2005 के आदेश के तहत जारी रहेगी। इससे दूरस्थ इलाकों में संचार सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कृषि क्षेत्र में बढ़ी दरें, लेकिन राहत भी

कृषि पंपों के लिए बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। इससे किसानों की सिंचाई लागत बढ़ सकती है। हालांकि गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों पर ऊर्जा शुल्क में दी जाने वाली छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे किसानों को आंशिक राहत मिलेगी।

किसानों के लिए पुरानी सुविधा बरकरार

आयोग ने किसानों को खेतों में लगे विद्युत पंपों के पास 100 वॉट तक बिजली उपयोग की सुविधा जारी रखने का निर्णय लिया है। इस बिजली का उपयोग रोशनी और छोटे कृषि कार्यों के लिए किया जाता है, जिससे किसानों की दैनिक जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रमुख बदलाव एक नजर में

  • घरेलू बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी
  • गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि
  • कृषि पंपों की दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट इजाफा
  • स्थानीय निकाय कार्यालयों को घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया
  • स्ट्रीट लाइट और जल आपूर्ति टैरिफ को घरेलू श्रेणी में लाया गया
  • अस्थायी कनेक्शन पर दो वर्ष बाद सामान्य घरेलू टैरिफ लागू होगा
  • गैर-सब्सिडी कृषि पंपों पर ऊर्जा छूट 30% से बढ़ाकर 40% की गई
  • बस्तर और सरगुजा के मोबाइल टावरों को 25% ऊर्जा शुल्क छूट जारी
  • किसानों के लिए 100 वॉट तक बिजली उपयोग की सुविधा यथावत

नई टैरिफ व्यवस्था के लागू होने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न वर्गों पर इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा। जहां एक ओर उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा, वहीं कुछ श्रेणियों को दी गई राहत से संतुलन बनाने का प्रयास भी किया गया है।

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