
दुर्ग। 6 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म एवं हत्या के गंभीर मामले में दुर्ग पुलिस की त्वरित और वैज्ञानिक विवेचना के बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने मामले को “विरलतम से विरलतम” श्रेणी का मानते हुए यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही एक अन्य धारा में आरोपी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से भी दंडित किया गया है।
जानकारी के अनुसार 6 अप्रैल 2025 को थाना मोहन नगर क्षेत्र में 6 वर्ष 3 माह की बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देरी किए बालिका की तलाश शुरू कर दी। पुलिस टीमों ने तकनीकी एवं मैदानी सूचनाओं के आधार पर संभावित स्थानों पर तलाश की। इसी दौरान बालिका को एक वाहन से बरामद किया गया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय, DNA और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित किया। घटनास्थल से आवश्यक सामग्री, आरोपी के कपड़े, जैविक नमूने, CCTV फुटेज और DVR सहित अन्य साक्ष्यों को जब्त कर FSL एवं DNA परीक्षण के लिए भेजा गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके मेमोरेण्डम के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी भी की।
पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना में चिकित्सकीय, परिस्थितिजन्य, जैविक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आपस में जोड़कर प्रकरण को मजबूत बनाया गया। इसके बाद सभी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
विशेष दाण्डिक प्रकरण (पॉक्सो) क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफ.टी.एस.सी., विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाया। न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव, उम्र 24 वर्ष, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड क्रमांक 58, थाना मोहन नगर, जिला दुर्ग को पॉक्सो अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में दोषसिद्ध किया।
न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड तथा दोनों धाराओं में 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं एक साथ भुगताई जाएंगी। मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया नियमानुसार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के समक्ष होगी।
प्रकरण की त्वरित कार्रवाई और प्रभावी विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर, थाना प्रभारी निरीक्षक शिव चंद्रा, विवेचक सहित थाना मोहन नगर के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। न्यायालय में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने भी प्रभावी पैरवी की।
न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने का निर्देश दिया है।
दुर्ग पुलिस ने बालिका की पहचान और परिवार की गोपनीयता का ध्यान रखते हुए नाम, फोटो, पता या पहचान उजागर करने वाली जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों की गुमशुदगी अथवा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई और साक्ष्यों का संरक्षण किया जा सके।















