ब्रेकिंग
इंडियन जर्नलिस्ट फेडरेशन की मासिक बैठक संपन्न, संगठन की मजबूती और एकजुटता पर दिया गया जोर दुर्ग में छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन की पहल, स्कूली बच्चों को टाई, बेल्ट और आई-कार्ड का वितरण घर के बाहर खड़े वाहनों से बैटरी चोरी करने वाला शातिर आरोपी गिरफ्तार, 15 बैटरियां बरामद भिलाई में बुजुर्ग महिला से चैन स्नेचिंग का खुलासा, मां-बेटे ने मिलकर की थी वारदात; सोने की चैन समेत ... पंजाब से हेरोइन लाकर भिलाई-दुर्ग में सप्लाई करने वाला गिरोह पकड़ा गया, 18 ग्राम चिट्टा समेत 6 आरोपी ... कुलगाम आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों की गई जान, आतंकियों की तलाश में घेराबंदी तेज रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर! अब ऑनलाइन बुक होगा ट्रेन का सामान, जानें लगेज लिमिट और नए नियम दुर्ग की पेयजल व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती : महापौर अलका बाघमार ने ली जल विभाग की समीक्षा बैठक, सीएम विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ में डिजिटल कने... छत्तीसगढ़ के विकास को नई रफ्तार देने की पहल, पीएम मोदी से सीएम साय ने की मुलाकात और रखी राज्य की बड़...
दुर्ग

दुर्ग में ‘पुष्पा’ का आतंक: वन विभाग की लापरवाही से पर्यावरण को भारी नुकसान

दुर्ग। फ़िल्म ‘पुष्पा’ का मशहूर डायलॉग “पुष्पा झुकेगा नहीं साला” तो आपने सुना होगा, लेकिन दुर्ग जिले में हकीकत का ‘पुष्पा’ कानून और प्रशासन को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है। जिले के उतई क्षेत्र में प्रतिबंधित अर्जुन (कहुआ) वृक्षों की अवैध कटाई और तस्करी का खेल वर्षों से जारी है।

डूमरडीह, गाढ़ाडीह, छाटा, गनियारी और छावनी चौक जैसे इलाकों में संचालित आरा मिलें इस अवैध धंधे का केंद्र बनी हुई हैं। हरे-भरे वृक्षों की कटाई कर इन्हें लकड़ी के गोलों में तब्दील किया जाता है। शिकायतें मिलने के बावजूद वन विभाग महज औपचारिक जांच कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।

टीपी बना ढाल, अधिकारी बने मूकदर्शक
वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचने पर ट्रांजिट परमिट (टीपी) के दस्तावेज देखकर ही संतुष्ट हो जाते हैं। वे कटे हुए वृक्षों की गीली लकड़ी और अन्य जिलों या राज्यों से आई सूखी लकड़ी के अंतर की जांच भी नहीं करते। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।

सुबह-शाम तस्करी के वाहन सक्रिय
प्रतिबंधित लकड़ियों से लदे वाहन (407 गाड़ियां) सुबह 4 बजे से 9 बजे तक और शाम के अंधेरे में इन आरा मिलों तक पहुंचते हैं। लेकिन न तो वन विभाग और न ही राजस्व विभाग के अधिकारी इन पर कोई कार्रवाई करते हैं।

मोटी रकम के बदले मिली सुरक्षा?
स्थानीय लोगों का दावा है कि यह ‘पुष्पा’ अधिकारियों को मोटी रकम देकर अपने अवैध धंधे को सुरक्षित चला रहा है। पाटन वन परिक्षेत्र में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई अब आम बात हो चुकी है। पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान के साथ ही शासन को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

क्या जागेगा वन विभाग?
प्रश्न यह उठता है कि आखिर कब वन विभाग इस अवैध गतिविधि पर कार्रवाई करेगा? क्या पर्यावरण को बर्बाद करने वाले इस ‘पुष्पा’ पर लगाम लगेगी, या वन विभाग और राजस्व विभाग की यह चुप्पी यूं ही जारी रहेगी?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button