ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ में फिर बिगड़ा मौसम, रायपुर-बिलासपुर समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य का सम्मान, छत्तीसगढ़ के 64 शिक्षकों को राज्यपाल करेंगे सम्मानित दर्दनाक सड़क हादसा, पेड़ से टकराई बाइक; दो नाबालिगों की मौके पर मौत कर्ज वसूली के नाम पर बर्बरता, महिला और बेटे को बंधक बनाकर पीटा; निर्वस्त्र कर वीडियो बनाने का आरोप नर्मदा में 15 लोगों की जान पर बनी! पेट्रोलिंग बोट का इंजन बंद, तेज बहाव में डूबी नाव भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा - मुख्यम... मृत भालू के नाखून काटकर ले जाने वाले दो आरोपी गिरफ्तार रायगढ़ की बदलेगी तस्वीर: विकास परियोजनाओं का वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने किया मैराथन निरीक्षण जल संरक्षण में सूरजपुर का ऐतिहासिक प्रदर्शन- देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में मिला पहला स्थान जिस पानी से बुझती है प्यास, वही बढ़ा रहा किडनी की बीमारी का खतरा? सामने आया बड़ा दावा
दुर्ग

केन्द्रीय जेल दुर्ग में सजा भुगत रहे बंदियों को रोजगारमुखी प्रशिक्षण, पुनर्वास की दिशा में सराहनीय पहल

दुर्ग। केन्द्रीय जेल दुर्ग अब केवल दंड भुगतने की जगह नहीं, बल्कि आशा, आत्मनिर्भरता और पुनर्वास का नया केंद्र बनती जा रही है। जेल अधीक्षक मनीष संभाकर की पहल पर यहां बंदियों को एलईडी बल्ब निर्माण का प्रशिक्षण देकर न केवल उन्हें नया कौशल सिखाया जा रहा है, बल्कि उनके जीवन को भी नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है।

इस अभिनव पहल के तहत अब जेल में बंदी हर दिन सैकड़ों एलईडी बल्ब बना रहे हैं। पहले जो बंदी इस कार्य से पूरी तरह अनभिज्ञ थे, आज वे कुशल कारीगर बन चुके हैं। इस प्रशिक्षण से बंदियों को जहां आत्मविश्वास मिला है, वहीं उनके मन में भविष्य को लेकर नई उम्मीदें भी जगी हैं।

जेल प्रशासन का मानना है कि यह कौशल न केवल उन्हें सजा पूरी होने के बाद रोजगार के अवसर देगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने में भी मदद करेगा। वर्तमान में यहां निर्मित बल्ब बाजार में भी बेचे जा रहे हैं, जिससे यह पहल आत्मनिर्भरता की ओर एक ठोस कदम बन चुकी है।

बंदी भी इस प्रयास से बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने जीवन को दोबारा सही राह पर लाने का मौका मिला है। कई बंदियों के परिवारों ने भी इस पहल की सराहना की है। उन्हें अब अपने अपनों के उज्जवल भविष्य की उम्मीद है।

यह पहल केवल बंदियों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश दे रही है कि एक सकारात्मक सोच, सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर कोई भी जीवन बदल सकता है। केंद्रीय जेल दुर्ग का यह प्रयोग न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि देशभर के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनता जा रहा है।

अब हर एलईडी बल्ब की रौशनी, इन बंदियों के अंधेरे जीवन में उजाला भर रही है — एक नई शुरुआत, एक नई उम्मीद, और समाज में सम्मानपूर्वक वापसी की ओर मजबूत कदम।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button