ब्रेकिंग
पुलिस स्मृति दिवस पर प्रथम वाहिनी छसबल, भिलाई में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि, पुलिस महानिरीक्... दुर्ग में स्टील प्लांट में दुर्घटना के बाद जे.डी. स्टील इंडस्ट्रीज के निदेशक और ठेकेदार के खिलाफ एफआ... पुलिस स्मृति दिवस पर नवागढ़ थाना प्रभारी टीआई श्री मनीकांत पाण्डेय सहित पुलिस स्टाफ का सम्मान जवाहर नगर में धूमधाम से मना दशहरा उत्सव, महापौर की उपस्थिति में रावण,के पुतले का दहन, दुर्ग में आज होगा ऐतिहासिक महाकन्या भोज, शोभायात्रा के बाद कन्याओं को कराया जाएगा भोज मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु प्रेम प्रसंग के विवाद में युवती के मंगेतर पर जानलेवा हमला, मिर्च पाउडर डालकर धारदार हथियार से वार कर... गलत वेतन भुगतान की वसूली के नाम पर कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद हो, सेवानिवृत्ति से 2 वर्ष पूर्व अनिव... ऑनलाइन सट्टा एप 3Stumps के मास्टरमाइंड बाबू उर्फ गुलशन खेमानी की लगभग 1.42 करोड़ रुपये की संपत्ति कु... दुर्ग में हत्या के फरार आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित, सूचना देने वाले की पहचान रहेगी गोपनीय
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का पहला मरमेड बेबी, जन्म के तुरंत बाद चली गई जान, डॉक्टरों और नर्सों के उड़े होश

धमतरी। धमतरी में एक महिला ने ‘मरमेड सिंड्रोम’ या ‘सिरेनोमेलिया’ से पीड़ित शिशु को जन्म दिया। नवजात के दोनों पैर आपस में जुड़े हुए थे, जिससे वह जलपरी की तरह दिखाई दे रहा था। जन्म के तीन घंटे बाद ही शिशु की मौत हो गई।

डॉक्टरों के अनुसार, यह छत्तीसगढ़ का पहला और देश का पांचवां मामला है। डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्चे का ऊपरी हिस्सा सामान्य था, लेकिन निचला हिस्सा पूरी तरह जुड़ा हुआ था और वजन महज 800 ग्राम था।

मरमेड सिंड्रोम एक दुर्लभ जन्मजात विकार है, जिसमें भ्रूण तक सही तरीके से रक्त नहीं पहुंच पाता या मां से पोषण की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके अलावा कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव या पर्यावरणीय कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं। इस विकृति में शिशु की किडनी, मूत्रमार्ग और जननांग जैसे जरूरी अंग विकसित नहीं होते, जिसके कारण नवजात का जीवनकाल बेहद छोटा होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मरमेड सिंड्रोम की स्थिति इतनी गंभीर होती है कि अधिकतर बच्चे मृत पैदा होते हैं या जन्म के कुछ घंटे या अधिकतम कुछ दिन ही जीवित रह पाते हैं। लड़कों की तुलना में यह विकृति लड़कियों में तीन गुना अधिक पाई जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button