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“पेंशन अधिकार है, दया नहीं” राष्ट्रीय पेंशनर दिवस (17 दिसंबर) के अवसर पर

रायपुर। छत्तीसगढ़ अधिकारी–कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन, जिला शाखा रायपुर द्वारा आज राष्ट्रीय पेंशनर दिवस के अवसर पर वरिष्ठ पेंशनर्स सम्मान समारोह का भव्य आयोजन कर्मचारी भवन, रायपुर में किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस  अशोक अग्रवाल, विशेष अतिथि  आर.के. त्रिवेदी (सेवानिवृत्त विशेष आयुक्त, जीएसटी) रहे। समारोह की अध्यक्षता जिला संरक्षक  विजय झा ने की, जबकि जिलाध्यक्ष  पंकज नायक मंचासीन रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ पेंशनर्स आंदोलन के पुरोधा स्व.  डी.एस. नाकारा के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर  विजय झा,  अशोक अग्रवाल,  आर.के. त्रिवेदी,  राजेन्द्र उमाठे,  पंकज नायक,  शंकर तम्बोली,  सी.एल. दुबे एवं  लक्ष्मण प्रसाद पनका ने अपने विचार व्यक्त किए।

 

वक्ताओं ने राष्ट्रीय पेंशनर दिवस की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पेंशन को एक वैधानिक अधिकार बताया। जिलाध्यक्ष  पंकज नायक ने अपने संबोधन में कहा कि 17 दिसंबर 1982 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा डी.एस. नाकारा बनाम भारत सरकार प्रकरण में दिया गया निर्णय पेंशनरों के अधिकारों का मील का पत्थर है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पेंशन कोई दया या कृपा नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति से पूर्व दी गई सेवाओं के बदले प्राप्त अधिकार है।

वक्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना एवं नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंतर, डिजिटल युग में पेंशनर्स के समक्ष चुनौतियाँ, तथा सामाजिक सुरक्षा के प्रश्नों पर भी अपने विचार रखे। यह बताया गया कि आर्थिक मितव्ययिता के नाम पर पेंशन व्यवस्था को सीमित करना वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2008 में नियमित किए गए वर्कचार्ज कर्मचारियों को मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को अपर्याप्त बताते हुए इसे सम्मानजनक जीवन के लिए नाकाफी कहा गया।

वक्ताओं ने आगाह किया कि आगामी वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में तीव्र वृद्धि होने वाली है, ऐसे में सरकार को दूरदर्शी एवं मजबूत सामाजिक सुरक्षा नीति तैयार करनी होगी।

समारोह में उपस्थित 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनर साथियों का अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम के अंत में  यशवंत भोंसले ने समापन उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों, पेंशनर साथियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर बी.पी. कुरिल, मानक लाल पाण्डेय, विमल कुंडू, के.एन. शर्मा, प्यारेलाल सेन, राकेश त्रिवेदी, यशवंत भोंसले, मालिकराम चन्द्राकर, महेंद्र राठौर,  राम तांडी सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स साथी उपस्थित रहे।

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