ब्रेकिंग
दुर्ग में आज होगा ऐतिहासिक महाकन्या भोज, शोभायात्रा के बाद कन्याओं को कराया जाएगा भोज मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु प्रेम प्रसंग के विवाद में युवती के मंगेतर पर जानलेवा हमला, मिर्च पाउडर डालकर धारदार हथियार से वार कर... गलत वेतन भुगतान की वसूली के नाम पर कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद हो, सेवानिवृत्ति से 2 वर्ष पूर्व अनिव... ऑनलाइन सट्टा एप 3Stumps के मास्टरमाइंड बाबू उर्फ गुलशन खेमानी की लगभग 1.42 करोड़ रुपये की संपत्ति कु... दुर्ग में हत्या के फरार आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित, सूचना देने वाले की पहचान रहेगी गोपनीय मछली के दाम बढ़ाने की मांग, मछुआ सोसायटी विकास परिषद ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग अनुकंपा नियुक्ति वाले उच्च शिक्षित कर्मचारियों को कौशल परीक्षा से मिले छूट और कंप्यूटर/तकनीकी डिग्रि... -शहर के विभिन्न उद्यानों का 41.37 लाख रुपये से होगा संधारण एवं सौंदर्यीकरण, महापौर अलका बाघमार ने कि...
छत्तीसगढ़

नक्सल प्रभाव लगभग खत्म, बस्तर में सुरक्षा कैंपों से शुरू होगा विकास का नया दौर

बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता का दावा किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार अब इस क्षेत्र का करीब 96 प्रतिशत इलाका नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुका है, जिससे यहां शांति और विकास की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

सुरक्षा के लिए बने 400 से अधिक कैंप

गृह राज्य मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पिछले दस वर्षों में दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा मजबूत करने के लिए 400 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। इनमें से करीब 120 कैंप पिछले दो वर्षों में ही बनाए गए, जिससे दुर्गम क्षेत्रों तक सुरक्षा बलों की पहुंच संभव हो सकी।

अब विकास की दिशा में बढ़ेंगे कदम

नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद सरकार ने इन कैंपों के उपयोग को केवल सुरक्षा तक सीमित न रखने का फैसला किया है। योजना के तहत इन्हें स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रशासनिक सुविधाएं और सरकारी योजनाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। कई स्थानों पर ये कैंप पहले ही एकीकृत विकास केंद्र के रूप में काम करने लगे हैं, जहां स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य जांच, राशन और अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में भी हालात बेहतर

अधिकारियों के अनुसार बस्तर के सीमावर्ती इलाकों में अब सिर्फ 35 से 40 माओवादी कैडर ही सक्रिय बचे हैं। नक्सल विरोधी अभियान में आधुनिक तकनीक और खुफिया सहयोग की भी बड़ी भूमिका रही है, जिसमें ISRO, NTRO, Indo-Tibetan Border Police और National Security Guard जैसी एजेंसियों का योगदान रहा है।

शीर्ष माओवादी कमांडर का आत्मसमर्पण

इसी बीच माओवादी संगठन के वरिष्ठ कमांडर पापा राव ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इसे सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

सरकार का कहना है कि पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, ताकि बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग मजबूत हो सके। आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अभियान जारी रहेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button