डबल इंजन सरकार का ‘मजबूत विकास’ पहली ही बारिश में बह गया। 15 लाख रुपये का रपटा 15 मिनट भी नहीं टिक पाया
15 लाख का रपटा पहली ही बारिश में बहा: पहले दी गई थी लिखित चेतावनी, अब भाजपा सरकार, प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर उठे सवाल

भैयाथान/सूरजपुर। गोबरी नदी पर लगभग 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित रपटा पहली ही बारिश में बह जाने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच तथा दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद भाजपा सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी विपक्षी नेताओं एवं स्थानीय लोगों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं।
पहले ही प्रशासन को दी गई थी लिखित चेतावनी
जनपद पंचायत भैयाथान के सभापति (सहकारिता एवं उद्योग विकास विभाग) राजू कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भैयाथान को लिखित आवेदन देकर गोबरी नदी पर बने रपटा पुल की जर्जर स्थिति की जांच कराने तथा तत्काल मरम्मत की मांग की थी।
आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि रपटा पुल क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहा है और यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो बारिश के दौरान कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही सक्षम तकनीकी अधिकारियों से जांच कराकर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग की गई थी।
चेतावनी के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, अब बह गया रपटा
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। लगातार बारिश के बीच गोबरी नदी का जलस्तर बढ़ा और रपटा बह गया। सौभाग्य से घटना के समय कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय कोई व्यक्ति या वाहन पुल पर होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
सड़क का तीन बार भूमिपूजन, फिर भी अधूरी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मार्ग की सड़क का तीन बार भूमिपूजन किया गया, लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। वहीं जिस रपटे को विकास की उपलब्धि बताकर प्रचारित किया गया था, वह कुछ ही दिनों में बह गया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और विभागीय अधिकारियों द्वारा निरीक्षण पर निरीक्षण किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत तस्वीरों में साफ दिखाई दे रही है।
युवाओं ने चंदा जुटाकर बनाई अप्रोच रोड
रपटा बहने के बाद गांव का संपर्क टूट गया। स्थानीय युवाओं ने स्वयं चंदा एकत्र कर अस्थायी अप्रोच रोड बनाई ताकि लोगों का आवागमन जारी रह सके। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन तब सक्रिय हुआ जब लोगों ने अपने स्तर पर व्यवस्था करनी शुरू कर दी।
सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं को घेरा
घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भाजपा सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को घेरना शुरू कर दिया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब निर्माण पूरा हुआ था तब इसे विकास की बड़ी उपलब्धि बताकर बधाइयां दी जा रही थीं, लेकिन अब पहली ही बारिश में रपटा बह जाने के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा?
लोगों का कहना है कि जनता के पैसों से बनने वाले विकास कार्य यदि कुछ दिनों में ही बह जाएं तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
राजू कुमार गुप्ता, सभापति सहकारिता एवं उद्योग विकास विभाग , जनपद पंचायत भैयाथान का बयान
मैंने 7 जुलाई 2026 को ही एसडीएम भैयाथान को लिखित आवेदन देकर गोबरी नदी पर बने रपटा पुल की जांच और तत्काल मरम्मत की मांग की थी। आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और आज रपटा बह गया। पूरे मामले की तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

मदनेश्वर साहू, स्थानीय नेता का बयान
> “डबल इंजन सरकार में विकास कार्यों की गुणवत्ता ऐसी नहीं होनी चाहिए कि पहली ही बारिश में पुल और रपटा बह जाए। यदि निर्माण कार्य में लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो संबंधित इंजीनियर, एसडीओ, ईई तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। यह सौभाग्य की बात है कि कोई जनहानि नहीं हुई। जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
स्थानीय ग्रामीणों का बयान
> “सड़क का कई बार भूमिपूजन हुआ, लेकिन आज तक निर्माण पूरा नहीं हुआ। रपटा भी पहली बारिश नहीं झेल पाया। अब प्रशासन को बताना चाहिए कि आखिर जनता के पैसे से बने विकास कार्य इतने कमजोर क्यों साबित हो रहे हैं।”
स्थानीय युवाओं का बयान
> “रपटा बहने के बाद गांव का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। मजबूरी में गांव के युवाओं ने चंदा इकट्ठा कर अस्थायी अप्रोच रोड बनाई ताकि लोगों की आवाजाही जारी रह सके।”
स्थानीय नागरिकों की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा, खर्च की जांच तथा दोषी अधिकारियों, ठेकेदार और संबंधित एजेंसी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाले विकास कार्य टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण होने चाहिए।
“डबल इंजन सरकार का ‘मजबूत विकास’ पहली ही बारिश में बह गया। 15 लाख रुपये का रपटा 15 मिनट भी नहीं टिक पाया।
निर्माण के समय बधाइयों की बाढ़ थी, अब रपटा बह गया तो बधाई देने वाले भाजपा नेता भी नज़र नहीं आ रहे हैं।
अब समय है कि वही नेता अपने मंत्री, विधायक और संबंधित विभाग को इस ‘ऐतिहासिक विकास’ के लिए फिर से बधाई दें।
जनता पूछ रही है— विकास बहा है या भरोसा? जवाब का इंतज़ार रहेगा।
नोट: समाचार में भाजपा सरकार, अधिकारियों और निर्माण कार्य को लेकर व्यक्त आरोप संबंधित नेताओं और स्थानीय नागरिकों के बयान एवं दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी।












