ब्रेकिंग
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का जिला अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक मार्च, मांगों को लेकर सरकार के नाम सौंपा ज्ञ... साड़ी की जिद बनी मौत की वजह! पत्नी ने पति को उतारा मौत के घाट CM साय से लघु उद्योग भारती की मुलाकात, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर की तैयारियों पर हुई अहम चर्चा Sai Cabinet Meeting Today: आज साय सरकार ले सकती है बड़े फैसले, किसानों के लिए हो सकता है बड़ा ऐलान लोक कर्म विभाग की समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की प्रगति पर सख्त नजर, समय-सीमा में कार्य पूर्ण करन... भव्य सावन मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, सांस्कृतिक समिति की बैठक में बनी कार्ययोजना, छत्तीसगढ़ में मेहरबान हुआ मानसून, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश; मौसम विभाग का ऑरेंज-येलो अलर्ट दुर्ग में अंधे कत्ल का खुलासा: महिला की हत्या के मामले में 2 आरोपी गिरफ्तार, दुष्कर्म की कोशिश नाकाम... सी.जी. सुपरफास्ट न्यूज़ के संपादक सुरेश गुप्ता ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को दी जन्मदिन की शुभकामना... राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव 2026-27 का भव्य आयोजन, नए शिक्षा सत्र का हुआ शुभारंभ
छत्तीसगढ़

तीखी जुबानी लड़ाई: भूपेश बघेल ने शास्त्री को ढोंगी करार दिया और सरकारी संसाधनों पर उठाया विवाद

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को लेकर कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट शेयर कर शास्त्री को साधु-महात्माओं के समक्ष शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी और उन्हें ढोंगी करार दिया। बघेल का कहना है कि प्रदेश के मठ-मंदिरों में विद्वान साधु-संतों के साथ शास्त्रार्थ करके ही उनकी बातों पर भरोसा किया जा सकता है।

भूपेश बघेल ने अपने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि जब धीरेंद्र शास्त्री का जन्म भी नहीं हुआ था, तब से वे स्वयं हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सनातन धर्म क्या है, यह सिखाने का अधिकार केवल उन्हें ही कैसे प्राप्त है। बघेल ने यह भी कहा कि उनके ससुराल में पांच साधु रहते हैं, लेकिन वे इस तरह का ढोंग नहीं करते।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि कथावाचक शास्त्री को सरकारी विमान से लाना खजाने का दुरुपयोग है। उन्होंने सवाल किया कि किस संवैधानिक हैसियत के तहत शास्त्री के लिए सरकारी विमान की व्यवस्था की गई।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री न तो किसी मान्यता प्राप्त धर्मपीठ के पीठाधीश्वर हैं और न ही किसी शास्त्र के अधिकृत विद्वान। वे कथावाचक हो सकते हैं, लेकिन खुद को धर्माचार्य के रूप में पेश करना गलत है। उनके बयान और आचरण देश की गंगा-जमुनी संस्कृति के खिलाफ हैं और समाज में विभाजन पैदा करने वाला साबित हो सकते हैं।

इस बयानबाजी के बाद छत्तीसगढ़ में धर्म, आस्था और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस फिर से गर्म हो गई है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button