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हाईकोर्ट से मेयर और 32 पार्षदों को झटका, भिलाई निगम आयुक्त के खिलाफ याचिका खारिज

दुर्ग: भिलाई नगर निगम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेयर और 32 पार्षदों को राहत देने से इनकार करते हुए निगम आयुक्त राजीव पांडेय को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बहुमत के आधार पर वैधानिक प्रक्रिया और कानून की अनदेखी नहीं की जा सकती।

मामला 25 मार्च को आयोजित भिलाई नगर निगम की विशेष बजट बैठक से जुड़ा है। मेयर और पार्षदों का दावा था कि बैठक में तीन-चौथाई से अधिक बहुमत से निगम आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित बैठक विशेष रूप से बजट पारित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी और उसके एजेंडे में निगम आयुक्त को हटाने का कोई प्रस्ताव शामिल नहीं था। अदालत ने कहा कि किसी विशेष बैठक में केवल उन्हीं विषयों पर चर्चा और निर्णय लिया जा सकता है, जो पहले से निर्धारित एजेंडे का हिस्सा हों।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने बजट बैठक में पारित आयुक्त को हटाने संबंधी प्रस्ताव को कानूनी रूप से वैध नहीं माना और मेयर सहित 32 पार्षदों की याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद भिलाई नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में राज्य सरकार या याचिकाकर्ताओं की ओर से आगे की कानूनी रणनीति को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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