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छत्तीसगढ़बस्तर

झीरम घाटी कांड पर आज फैसला, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने न्याय को लेकर रखी अपनी बात

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए (NIA) की विशेष अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में 31 अगस्त को मामले में फैसला आने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। घटना के करीब 13 साल बाद भी झीरम घाटी कांड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। फैसले से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बयान के बाद प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।

NIA की जांच पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच निष्पक्ष और सही दिशा में नहीं हुई।

भूपेश बघेल के मुताबिक, दरभा थाने में दर्ज एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल थे, उनसे भी पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने कहा कि एनआईए कोर्ट की ओर से गुड्सा उसेंडी का बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसका बयान भी दर्ज नहीं किया गया। इसके अलावा घटना के समय मौके पर मौजूद कई लोगों से पूछताछ और गवाही नहीं कराई गई।

उन्होंने कहा कि झीरम घाटी हमले के पीछे के कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए भी जांच में पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। उनका कहना है कि यदि जांच की शुरुआत ही सही तरीके से नहीं हुई तो उसके आधार पर तैयार रिपोर्ट और फैसले को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

SIT जांच को लेकर भी भाजपा पर निशाना

भूपेश बघेल ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री के सामने झीरम मामले की जांच को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि यदि केंद्र सरकार या उसकी एजेंसियां मामले की सही जांच नहीं कर पा रही हैं तो जांच राज्य सरकार को सौंप दी जाए।

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया था। इसके बाद एनआईए हाईकोर्ट पहुंच गई। राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई और फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया, लेकिन तब तक उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने मामले की नए सिरे से जांच के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने इसे झीरम घाटी कांड की जांच को दबाने का प्रयास बताया।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला

गौरतलब है कि 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी।

हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और विधायक उदय मुदलियार समेत कई लोगों की जान चली गई थी।

झीरम घाटी कांड को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में गिना जाता है। मामले की जांच लंबे समय से चल रही है और अब दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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