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विशाखापत्तनम में पीएम मोदी का संदेश – “तनावग्रस्त दुनिया के लिए योग बने वैश्विक साझेदारी का माध्यम”

विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश | अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 11वें संस्करण पर आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक भव्य और ऐतिहासिक योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण भी मंच पर उपस्थित रहे। आयोजन में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और हजारों योग साधकों ने भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि “आज की दुनिया तनाव और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में योग हमें शांति, स्थिरता और संतुलन का मार्ग दिखाता है।” उन्होंने विश्व समुदाय से आग्रह किया कि योग को केवल व्यक्तिगत अभ्यास के रूप में न देखें, बल्कि उसे वैश्विक साझेदारी और सहयोग का माध्यम बनाएं।

मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि योग को “लोकनीति” का हिस्सा बनाकर मानवता की सेवा में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने भारत की सामूहिक भावना और संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा, “जब जनता किसी लक्ष्य को थाम लेती है तो उसे कोई नहीं रोक सकता। ‘मी टू वी’ की भावना भारत की आत्मा का हिस्सा है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर भारत के नेवी जहाजों से लेकर ओपेरा हाउस की सीढ़ियों, हिमालय की ऊँचाइयों और समुद्र की गहराइयों तक योग का अभ्यास किया गया। उन्होंने इसे योग की सार्वभौमिकता और समावेशिता का प्रतीक बताया – “योग सभी का है और सभी के लिए है।”

आरके बीच पर आयोजित इस कार्यक्रम में 3.19 लाख से अधिक लोगों के एक साथ योग करने की व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा, तकनीकी और समन्वय से जुड़ी तैयारियाँ बेहद सघन और व्यवस्थित रहीं। अनुमान के अनुसार, इस बार पूरे भारत और दुनिया के लगभग 8 लाख स्थानों पर एकसाथ योग किया गया, जिससे भारत का प्राचीन योग संदेश पूरी दुनिया में गूंज उठा।

प्रधानमंत्री ने इस आयोजन की सफलता पर विशाखापत्तनम की जनता, मुख्यमंत्री नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का आभार व्यक्त किया और योग के प्रति देश और दुनिया की बढ़ती चेतना पर प्रसन्नता जताई।

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