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छत्तीसगढ़

न्यायालय परिसर में संविधान दिवस पर महाविद्यालय छात्रों के साथ विशेष कार्यक्रम, मूल अधिकारों और कर्तव्यों पर दिया जोर

 संवाददाता, सौरभ साहू :-

सूरजपुर : जिले में संविधान दिवस (26 नवंबर) के पावन अवसर पर विधिक सेवा प्राधिकरण और न्यायिक विभाग की पहल पर शिक्षण संस्थानों में वृहद कानूनी जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गिरवरगंज में आयोजित इन कार्यक्रमों में न केवल संविधान के महत्व को समझाया गया, बल्कि युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक भी किया गया।

यह संपूर्ण आयोजन माननीय अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मती विनीता वार्नर के कुशल नेतृत्व और सक्रिय मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

महाविद्यालय में संविधान की प्रस्तावना और कर्तव्यों पर मंथन

शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय और नवीन कन्या महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश  मानवेंद्र सिंह और माननीय द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश  सुमित कुमार हर्षयाना ने की। इस दौरान मंच पर व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी  हिमांशु पंडा और डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल  राजेंद्र प्रसाद पाठक विशेष रूप से आसीन रहे।

“अधिकारों के साथ कर्तव्य भी जरूरी”

मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित करते हुए न्यायाधीश  मानवेंद्र सिंह ने संविधान दिवस की बधाई दी। उन्होंने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा: भारतीय संविधान की प्रस्तावना केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र का सार है। वर्तमान समय में देखा जाता है कि लोग अपने मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के प्रति तो बहुत मुखर रहते हैं, लेकिन संविधान में वर्णित ‘मूल कर्तव्यों’ (Fundamental Duties) को भूल जाते हैं। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतना ही सजग और ईमानदार रहना चाहिए, जितना हम अधिकारों के लिए रहते हैं।

संविधान ही देश का सर्वोच्च दस्तावेज

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायाधीश  सुमित कुमार हर्षयाना ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ हमारा संविधान देश का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि देश में जितनी भी विधियां (Laws) या कानून बनाए जाते हैं, वे सभी संविधान की मूल भावना के अनुरूप ही होते हैं। संविधान से ऊपर कुछ भी नहीं है।

“कर्तव्य पालन से ही देश सुरक्षित”

डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस कौंसिल  राजेंद्र प्रसाद पाठक ने राष्ट्र की सुरक्षा को नागरिकों के कर्तव्यों से जोड़ते हुए कहा कि हमारा देश तभी सुरक्षित और सशक्त रहेगा, जब हम अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करेंगे। उन्होंने संविधान बनने की ऐतिहासिक प्रक्रिया और प्रस्तावना में उल्लेखित मुख्य शब्दों (संप्रभुता, समाजवाद, पंथनिरपेक्षता आदि) के गूढ़ अर्थों को सरल भाषा में समझाया।

प्रभारी प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार द्विवेदी ने भी अपने वक्तव्य में संविधान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।

गिरवरगंज स्कूल में छात्रों को मिली कानूनी जानकारी

दूसरी ओर, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गिरवरगंज में भी जागरूकता की लहर देखने को मिली। यहाँ आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी मती रुचि मिश्रा और व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी  आशीष भगत ने की। न्यायाधीशों ने स्कूली बच्चों को बाल अधिकारों, शिक्षा के अधिकार और संविधान के बुनियादी ढांचे के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी, जिससे छात्र काफी लाभान्वित हुए।

गरिमामयी उपस्थिति एवं संचालन:-

महाविद्यालय में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में शासकीय रेवती रमण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एच. एन. दुबे, शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य  बृजलाल साहू, और असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस कौंसिल कु. वैशाली देवांगन उपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त दोनों महाविद्यालयों के प्राध्यापकगण, शिक्षक, और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

कार्यक्रम का सफल और ओजस्वी मंच संचालन प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।

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