भारत में जल्द आ सकते हैं प्लास्टिक के नोट, RBI की हाई-लेवल बैठकों में बनी सहमति

मुंबई। भारत की मुद्रा व्यवस्था एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देश में पारंपरिक कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक यानी पॉलिमर नोटों को लाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। अगर यह योजना लागू होती है, तो यह भारतीय करेंसी सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा तकनीकी और संरचनात्मक बदलाव माना जाएगा।
RBI की बैठकों में हुआ बड़ा मंथन
बिजनेस रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में आरबीआई की दो महत्वपूर्ण केंद्रीय बोर्ड बैठकों—पटना और मुंबई में—प्लास्टिक नोटों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है। इन बैठकों में देश में पायलट प्रोजेक्ट के तहत सीमित स्तर पर पॉलिमर नोट जारी करने की संभावना पर रणनीति तैयार की गई।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में RBI इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए कुछ चुनिंदा शहरों में इसका परीक्षण शुरू करने की घोषणा कर सकता है।
2012 की पुरानी योजना फिर चर्चा में
यह कोई नया विचार नहीं है। वर्ष 2012 में भी केंद्र सरकार ने 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बनाई थी। इसके लिए देश के पांच शहरों—कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला—का चयन किया गया था। हालांकि उस समय तकनीकी और संचालन संबंधी चुनौतियों के कारण यह प्रयोग आगे नहीं बढ़ सका।
अब एक दशक बाद, आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा मानकों के साथ इस योजना को फिर से जीवित किया जा रहा है।
क्यों बदल रहा है RBI का फोकस?
प्लास्टिक नोटों को लेकर केंद्रीय बैंक की रुचि के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
1. लंबा जीवनकाल और मजबूती
पॉलिमर नोट पानी, गंदगी और सामान्य घिसावट से लगभग अप्रभावित रहते हैं। ये कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चल सकते हैं।
2. लागत में दीर्घकालिक बचत
हालांकि इनकी शुरुआती छपाई लागत अधिक होती है, लेकिन लंबे समय में बार-बार नोट बदलने और छपाई का खर्च काफी कम हो जाता है।
3. खराब नोटों का भारी बोझ कम होगा
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में अरबों की संख्या में खराब नोटों को नष्ट करना पड़ा, जिससे भारी संसाधन खर्च हुआ। पॉलिमर नोट इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
4. सुरक्षा में बढ़ोतरी
इन नोटों में उन्नत सुरक्षा फीचर्स जैसे पारदर्शी विंडो, होलोग्राम और विशेष स्याही का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो जाता है।
दुनिया पहले ही कर चुकी है बदलाव
करीब 60 देशों ने पहले ही पॉलिमर करेंसी को अपना लिया है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं, जहां यह प्रणाली सफलतापूर्वक काम कर रही है।
आगे क्या?
यदि RBI इस पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी देता है, तो भारत में भी जल्द ही कुछ खास मूल्यवर्ग के प्लास्टिक नोट देखने को मिल सकते हैं। यह कदम न सिर्फ भारतीय मुद्रा प्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि डिजिटल और नकदी अर्थव्यवस्था के बीच एक नया संतुलन भी स्थापित कर सकता है।











