GI Tag की लड़ाई में मसालों पर सियासी और कानूनी घमासान, राजस्थान-गुजरात आमने-सामने

मेहसाणा/बाड़मेर। जीरा और सौंफ के जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग को लेकर राजस्थान और गुजरात के किसानों के बीच विवाद गहरा गया है। विवाद तब शुरू हुआ जब जीआई रजिस्ट्री ने गुजरात के मेहसाणा जिले से जुड़े ‘ऊंझा जीरा’ और ‘ऊंझा सौंफ’ को GI टैग प्रदान किया। राजस्थान के किसान संगठनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि उनके राज्य में भी इन दोनों मसालों की बड़े पैमाने पर खेती होती है और केवल ऊंझा को विशेष पहचान देना अन्य उत्पादकों के हितों को प्रभावित कर सकता है।
ऊंझा, गुजरात के मेहसाणा जिले का प्रमुख मसाला व्यापार केंद्र है और इसे एशिया के सबसे बड़े मसाला बाजारों में गिना जाता है। लंबे समय से यह जीरा और सौंफ के व्यापार एवं निर्यात का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसके आधार पर GI टैग के लिए आवेदन किया गया था।
क्या होता है GI टैग?
जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) एक बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Right) है, जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े उत्पादों को उनकी गुणवत्ता, विशेषताओं या प्रतिष्ठा के आधार पर दिया जाता है। भारत में GI टैग का प्रावधान जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स ऑफ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट, 1999 के तहत किया गया है। यह टैग किसी उत्पाद की खेती पर रोक नहीं लगाता, बल्कि केवल पंजीकृत भौगोलिक नाम के उपयोग की सुरक्षा प्रदान करता है।
भारत में जीरे का अधिकांश उत्पादन राजस्थान और गुजरात में होता है। राजस्थान के जालोर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और पाली प्रमुख उत्पादक जिले हैं, जबकि गुजरात के बनासकांठा, पाटन, मेहसाणा, कच्छ और सुरेंद्रनगर में भी बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है।
राजस्थान के किसान संगठनों का कहना है कि राज्य में पीढ़ियों से जीरा और सौंफ की खेती होती आ रही है। उनका तर्क है कि केवल ऊंझा को GI टैग मिलने से घरेलू और निर्यात बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने इस निर्णय की समीक्षा की मांग की है।
भारत में वर्तमान में कृषि, हस्तशिल्प, वस्त्र और खाद्य उत्पादों सहित सैकड़ों वस्तुओं को GI टैग प्राप्त है। दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल, अल्फांसो आम और नागपुर संतरा जैसे उत्पाद पहले से इस सूची में शामिल हैं। अब ऊंझा जीरा और ऊंझा सौंफ भी इस सूची में जुड़ गए हैं, हालांकि इस पर उठे विवाद के चलते मामला आगे कानूनी और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच सकता है।













