ब्रेकिंग
दुर्ग में आज होगा ऐतिहासिक महाकन्या भोज, शोभायात्रा के बाद कन्याओं को कराया जाएगा भोज मां चंडिका मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु प्रेम प्रसंग के विवाद में युवती के मंगेतर पर जानलेवा हमला, मिर्च पाउडर डालकर धारदार हथियार से वार कर... गलत वेतन भुगतान की वसूली के नाम पर कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद हो, सेवानिवृत्ति से 2 वर्ष पूर्व अनिव... ऑनलाइन सट्टा एप 3Stumps के मास्टरमाइंड बाबू उर्फ गुलशन खेमानी की लगभग 1.42 करोड़ रुपये की संपत्ति कु... दुर्ग में हत्या के फरार आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित, सूचना देने वाले की पहचान रहेगी गोपनीय मछली के दाम बढ़ाने की मांग, मछुआ सोसायटी विकास परिषद ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन पत्रकारों, एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स के खिलाफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग अनुकंपा नियुक्ति वाले उच्च शिक्षित कर्मचारियों को कौशल परीक्षा से मिले छूट और कंप्यूटर/तकनीकी डिग्रि... -शहर के विभिन्न उद्यानों का 41.37 लाख रुपये से होगा संधारण एवं सौंदर्यीकरण, महापौर अलका बाघमार ने कि...
छत्तीसगढ़

धान खरीदी की तारीख बढ़ी, लेकिन किसानों की मुश्किलें बरकरार

बिलासपुर। जिले में धान खरीदी की अवधि बढ़ाने का फैसला किसानों के लिए उम्मीद लेकर आया था, लेकिन यह राहत कागजों तक ही सिमट कर रह गई। अतिरिक्त दिनों में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया बेहद सुस्त रही, जिससे शासन की खरीदी नीति और व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, जिले में धान खरीदी की नियमित प्रक्रिया 31 जनवरी को समाप्त हो गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में किसानों ने समय रहते धान नहीं बिक पाने की शिकायतें की थीं। किसानों के दबाव के बाद शासन ने 5 और 6 फरवरी को दो दिनों के लिए पुनः खरीदी की अनुमति दी, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ किसानों को नहीं मिल पाया।

अतिरिक्त अवधि में खरीदी रही नाममात्र
बढ़ाई गई अवधि के पहले दिन केवल 82 किसानों ने टोकन प्राप्त किए, जिसके तहत करीब 516 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। वहीं दूसरे दिन 29 समितियों के जरिए महज 51 टोकन जारी किए गए और अनुमानित 285 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका। इस तरह दो दिनों में कुल खरीदी लगभग 801 मीट्रिक टन पर ही सिमट गई।

यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि नियमित खरीदी के दौरान जिले में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 हजार मीट्रिक टन धान की आवक होती थी। इसके मुकाबले अतिरिक्त अवधि की खरीदी नगण्य रही।

आंकड़ों ने खड़े किए सवाल
जिले में इस वर्ष कुल 1 लाख 32 हजार किसान पंजीकृत थे, जिनमें से करीब 1 लाख 24 हजार किसानों ने लगभग 6 लाख 75 हजार मीट्रिक टन धान बेचा। वहीं पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 6 लाख 97 हजार मीट्रिक टन था। यानी इस साल लगभग 22 हजार मीट्रिक टन की गिरावट दर्ज की गई है।

कम खरीदी और धीमी प्रक्रिया ने टोकन व्यवस्था, नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि व्यवस्थाएं बेहतर होतीं तो बढ़ी हुई अवधि वास्तव में राहत साबित हो सकती थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button