ब्रेकिंग
दुर्ग में 27 लाख की हार्वेस्टर धोखाधड़ी का खुलासा, अधिकृत डीलर गिरफ्तार दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्यवाही रू 15 टन से अधिक कोयला जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के तहत निगम का जागरूकता अभियान तेज वॉल पेंटिंग और जनसहभागिता से सुंदर बन ... जिला स्काउट्स एवं गाइड्स ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाया हर दीवार दे रही स्वच्छता का संदेश, रंगों में बस रही शहर की नई पहचान, ’हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप’ नीट यूजी 2026 परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिये दिशा-निर्देश ’अवैध शिकार पर वन विकास निगम की बड़ी कार्रवाई, बारनवापारा क्षेत्र से एक आरोपी गिरफ्तार, भेजा गया जेल... अरुण साव बोले- कौशल विकास से युवाओं का भविष्य होगा मजबूत रायगढ़ वार्ड क्रमांक 26 को मिली सामुदायिक भवन की सौगात, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन
छत्तीसगढ़

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था, महिला ने फर्श पर बच्चे को जन्म दिया

भटगांव (सूरजपुर)। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही का मामला सामने आया। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गरीब महिला अपनी सास के साथ डिलीवरी कराने अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां न तो डॉक्टर थे, न नर्स, और न ही कोई अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी। करीब 4 घंटे तक अस्पताल परिसर में तड़पने के बाद महिला को मजबूरन फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। डिलीवरी के बाद उसने खुद ही खून से सने फर्श को साफ किया और नवजात को बेड पर लिटाकर खुद जमीन पर बैठी रही।

घटना के समय भटगांव निवासी जितेंद्र जायसवाल भी अपने परिचित को रेबीज का इंजेक्शन दिलाने पहुंचे, लेकिन उन्हें भी कोई जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिला। डॉक्टरों को फोन किया गया, मगर कॉल रिसीव नहीं हुआ। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर साक्षी सोनी 4 घंटे बाद पहुंचीं और सफाई में कहा कि उन्हें सूचना नहीं मिली थी। वहीं, ड्यूटी डॉक्टर शीला सोरेन का मोबाइल फोन बंद था और वह अनुपस्थित रहीं। अस्पताल प्रभारी डॉक्टर रतन प्रसाद मिंज ने मामले पर असहायता जताई, जबकि विकासखंड चिकित्सा अधिकारी राकेश सिंह ने जांच का आश्वासन दिया।

विडंबना यह है कि यह स्वास्थ्य केंद्र भटगांव विधानसभा मुख्यालय में है, जहां की विधायक खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंत्री के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की यह हालत है तो दूरस्थ गांवों में स्थिति और भी बदतर होगी। यह पहली घटना नहीं है—पूर्व में भी ऐसी लापरवाही सामने आती रही है, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही झूठे आरोप लगाकर प्रताड़ित करने के मामले सामने आए हैं।

इस घटना ने न सिर्फ स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे जिले की चिकित्सा व्यवस्था की हकीकत भी उजागर कर दी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button