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छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से महिलाओं को मिली नई पहचान

रायपुर:कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत झाटीबिन की महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के माध्यम से आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। वर्ष 2011 में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रारंभ इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के जरिए संगठित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

ग्राम झाटीबिन के शीतला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष सुशीला एवं सचिव सुमित्रा के नेतृत्व में 02 फरवरी 2020 से हर्बल गुलाल निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया। समूह को बैंक लिंकेज के माध्यम से 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। अब तक समूह द्वारा 3,09,900 रुपये की लागत से हर्बल गुलाल का उत्पादन कर 5,20,300 रुपये की आय अर्जित की गई है, जिससे 2,10,400 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।

इस वर्ष में होली पर्व को ध्यान में रखते हुए समूह की महिलाओं ने 72,750 रुपये की लागत से लगभग 5 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार किया है। प्राकृतिक पुष्पों एवं वनस्पतियों से निर्मित यह गुलाल रसायनमुक्त, त्वचा के लिए सुरक्षित तथा पर्यावरण के अनुकूल है। रासायनिक रंगों की तुलना में हर्बल गुलाल से त्वचा एलर्जी, जलन या आंखों को नुकसान की संभावना कम रहती है। साथ ही यह मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करता, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

सामान्य गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक का यह सफर महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने उन्हें न केवल रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम भी प्रदान किया है।

इस होली अपनों के साथ हर्बल गुलाल से रंगों का उत्सव मनाएं और स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को अपनाकर महिला सशक्तिकरण को समर्थन दें।

 

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