ब्रेकिंग
अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री श्री... बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पटरीपार सिकोला भाटा सब्जी मार्केट में निगम की बड़ी कार्रवाई, नाली के ऊपर बने 35 से अधिक अवैध निर्माण... छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास
बिलासपुर

बच्चों के राशन पर ई-केवाईसी का फंदा: हक छीनने का नया तरीका

अमित दुबे की रिपोर्ट :-

बिलासपुर:  रतनपुर से राशन कार्ड से बच्चों का नाम कटा, परिवार को मिल रहा कम राशन???? गरीबों के हक पर हो रहा है हमला।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मिलने वाले राशन में कटौती अब ई-केवाईसी के नाम पर की जा रही है। पहले बच्चों की ई-केवाईसी का कोई जिक्र नहीं हुआ, लेकिन अब अचानक उनका नाम राशन सूची से हटा दिया गया।

क्या है मामला?

बिलासपुर समेत कई जिलों में गरीब परिवारों के बच्चों के नाम राशन कार्ड से काट दिए गए हैं। कारण बताया जा रहा है ई-केवाईसी न होना। सवाल यह है कि जब शुरुआत में बच्चों की ई-केवाईसी की बात ही नहीं की गई,

तो अचानक उनके नाम काटकर राशन बंद क्यों किया गया? गरीब परिवार पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। अब बच्चों का राशन भी छीन लिया गया। क्या यही सुशासन है?

बिलासपुर की जनता ठगी गई

यह मामला और भी गंभीर तब बनता है, जब हम देखते हैं कि यह कटौती उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में हो रही है। जो राज्य खाद्य सुरक्षा कानून का दावा करता है, वहां गरीब बच्चों का भविष्य अंधकार में डालने की साजिश हो रही है।

प्रभावित परिवारों का दर्द

बिलासपुर रतनपुर के कई ग्रामीण परिवारों ने शिकायत की है कि बच्चों का नाम हटने से अब उन्हें राशन नहीं मिल रहा। ई-केवाईसी कराने का आदेश भी अचानक जारी हुआ और इसकी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि ज्यादातर गरीब परिवार इसे पूरा नहीं कर पाए।

सरकार की जिम्मेदारी

यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह गरीबों का हक सुनिश्चित करे। लेकिन ऐसा लगता है कि योजनाओं को जटिल बनाकर जनता को परेशान किया जा रहा है। सवाल यह है कि

बच्चों के नाम राशन सूची से क्यों काटे गए?

पहले ई-केवाईसी की अनिवार्यता क्यों नहीं बताई गई?

कटौती से प्रभावित परिवारों की भरपाई कौन करेगा?

क्या यही है सुशासन?

बच्चों का राशन काटकर उनकी भूख से खिलवाड़ करना, गरीब परिवारों के साथ अन्याय है। क्या यही सुशासन है? क्या गरीबों की परेशानियों को अनदेखा करना सरकार की नई नीति है?

गरीब जनता जवाब मांग रही है।
बच्चों_का_हक_छीना ईकेवाईसी_का_सच खाद्य_सुरक्षा_खतरे_में

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button