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सीधे भुगतान का असर: धान उपार्जन में बिलासपुर बना नंबर-वन

बिलासपुर  : बिलासपुर संभाग में धान उपार्जन अभियान अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है और इस बार खरीदी के आंकड़ों में बिलासपुर जिले ने स्पष्ट बढ़त बना ली है। सुव्यवस्थित व्यवस्था और किसानों को सीधे खाते में भुगतान की नीति ने इस सीजन में खरीदी की तस्वीर ही बदल दी है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले में पंजीकृत 1 लाख 32 हजार 656 किसानों में से 1 लाख 11 हजार 927 किसान धान बेच चुके हैं। अब तक करीब 1190 करोड़ रुपये किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं, जिससे बिलासपुर जिला पूरे संभाग में शीर्ष पर बना हुआ है।

सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य के तहत मोटा धान 2369 रुपये और पतला धान 2389 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है। बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने और भुगतान में पारदर्शिता आने से किसानों का भरोसा बढ़ा है। लंबे समय से सक्रिय रहे सिंडिकेट तंत्र पर भी प्रभावी अंकुश लगा है, जिसका असर उपार्जन केंद्रों पर साफ नजर आ रहा है।

संभाग के अन्य जिलों की स्थिति पर नजर डालें तो मुंगेली और सक्ती जिले भी संतोषजनक प्रगति दर्ज कर चुके हैं, जबकि कोरबा जिले की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। प्रतिशत के लिहाज से भले ही जांजगीर आगे हो, लेकिन किसानों की संख्या और 37 लाख क्विंटल से अधिक धान खरीदी के साथ बिलासपुर संभाग में सबसे आगे है।

इसी बीच धान के उठाव को लेकर भी प्रशासन ने गति बढ़ा दी है। परिवहन व्यवस्था को मजबूत करते हुए ट्रकों की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि खरीदे गए धान का समय पर उठाव हो सके। टोकन प्रणाली और तौल प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने से किसानों को अब मंडियों में रात बिताने की मजबूरी नहीं रह गई है, जिसे इस सीजन की बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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