कागज़ों का चमत्कार! श्रद्धा के नाम पर ठगी,आधार से बना महंत,फिर बेच दी मठ की जमीन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धर्म और आस्था की आड़ में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। एक शादीशुदा और दो बच्चों के पिता ने खुद को जैतूसाव मठ का फर्जी महंत घोषित कर दिया और 300 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की जमीन बेच डाली।
इस फर्जी महंत ने नाम और पहचान बदलने के लिए आधार कार्ड का दुरुपयोग किया। नाम के आगे ‘महंत राम’ और पीछे ‘दास’ जोड़कर खुद को संत साबित कर दिया। इस पहचान के सहारे धरमपुरा स्थित मठ की 75 एकड़ जमीन को बेच दिया। यही नहीं, इन जमीनों की रजिस्ट्री शराब घोटाले में फंसे अनवर ढेबर, भारत माला घोटाले में जेल में बंद हरमीत खनूजा और विकास शर्मा के नाम कर दी गई।
ट्रस्टियों की जांच में खुला राज
जैसे ही मामला सामने आया, जैतूसाव मठ के ट्रस्टियों ने जांच करवाई। पता चला कि वॉलफोर्ट सिटी रायपुर निवासी आशीष तिवारी ने खुद को ‘महंत राम आशीष दास’ बताकर 100 एकड़ से ज्यादा जमीन बेच दी है।
ट्रस्ट ने आपत्ति दर्ज कराई और मामले में कमिश्नर महादेव कावरे ने हाल ही में 57 एकड़ जमीन की बिक्री रद्द कर उसे मठ के नाम पर वापस दर्ज कर दिया। इससे पहले 5 एकड़ जमीन भी वापस मठ को लौटाई जा चुकी है। अब भी धरमपुरा में 13 एकड़ जमीन की वापसी प्रक्रिया लंबित है।
फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की ठगी
जांच में यह भी सामने आया कि आशीष तिवारी ने शब्बीर हुसैन नामक मुस्लिम व्यक्ति को समीर शुक्ला और उसके पिता को जीपी शुक्ला नाम देकर उनका भी फर्जी आधार कार्ड बनवाया। इनकी मदद से भी मंदिर की जमीनों की बिक्री की गई।एक अन्य खुलासा यह भी हुआ है कि अनवर ढेबर से अकेले ही इस फर्जी महंत ने 17 करोड़ रुपए की राशि ली थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को बताया था पीड़ित
गौरतलब है कि इस साल जनवरी में आशीष तिवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को जैतूसाव मठ का महंत बताते हुए दावा किया था कि 1987 से 2007 के बीच मठ की जमीनें अवैध रूप से बेची गई थीं।
लेकिन अब वही व्यक्ति खुद सबसे बड़ा जमीन घोटालेबाज निकला।
तहसीलदार की संदिग्ध भूमिका
इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। जैतूसाव मठ के प्रबंधक स्वयं रायपुर कलेक्टर होते हैं, लेकिन तत्कालीन तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने रजिस्ट्री दस्तावेजों से कलेक्टर का नाम मिटाकर आशीष दास को मालिकाना हक दे दिया। यह वही अजय चंद्रवंशी हैं, जिनका रायपुर से तबादला पहले भी 100 से ज्यादा फर्जी रजिस्ट्री के मामलों में हुआ था। फिलहाल उनकी पोस्टिंग गरियाबंद जिले के राजिम में है|
सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम
- कैसे एक आम नागरिक फर्जी पहचान बनाकर मठ की संपत्ति बेच सकता है?
- प्रशासनिक अमला क्या कर रहा था जब जमीनें लगातार बिक रही थीं?
- धार्मिक ट्रस्टों की संपत्तियों पर निगरानी क्यों नहीं रखी जा रही?
अब देखना है कि क्या सरकार और प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करता है या यह भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।














