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छत्तीसगढ़

नक्सलियों के सरेंडर पर सरकार सख्त, जनवरी 2026 तक मिल सकता है अंतिम अवसर

छत्तीसगढ़ से नक्सली सरेंडर और पुनर्वास नीति को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय नक्सलियों के आत्मसमर्पण की अंतिम तारीख तय करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अनुमान है कि जनवरी 2026 तक नक्सलियों को सरेंडर और पुनर्वास का आखिरी मौका दिया जा सकता है। इसके बाद सरकार नक्सलवाद के खिलाफ और अधिक सख्त रणनीति अपनाने की तैयारी में है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। देश के गृह मंत्री अमित शाह पहले ही नक्सलवाद के खात्मे को लेकर स्पष्ट घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में मौजूदा सरेंडर नीति को अंतिम अवसर के रूप में देखा जा रहा है, ताकि मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक नक्सली समय रहते आत्मसमर्पण कर सकें।

इसी बीच नक्सल विरोधी अभियान से जुड़ी एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ओडिशा के कंधमाल जिले के उसी जंगल क्षेत्र में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है, जहां हाल ही में नक्सली कमांडर गणेश उईके समेत छह नक्सली मुठभेड़ में मारे गए थे। तलाशी अभियान के दौरान जवानों ने इलाके से दो आईईडी बरामद किए, जिन्हें मौके पर ही ब्लास्ट कर निष्क्रिय कर दिया गया।

सुरक्षाबलों को आशंका है कि क्षेत्र में अभी भी अन्य नक्सली छिपे हो सकते हैं। इसी कारण पूरे जंगल इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। इस ऑपरेशन की लगातार मॉनिटरिंग ओडिशा पुलिस के डीआईजी ऑपरेशन आईपीएस अखिलेश्वर सिंह कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, नक्सली सरेंडर को लेकर सरकार का रुख साफ संकेत देता है कि अब नक्सलियों के पास सीमित समय है—या तो वे आत्मसमर्पण कर पुनर्वास की राह चुनें, या फिर सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई का सामना करें।

 

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