
दुर्ग: छत्तीसगढ़ में नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए चाईनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार नायलोन, सिंथेटिक या किसी भी प्रकार के धारदार पतंग धागे के निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और उपयोग को गैरकानूनी घोषित किया गया है। यह प्रतिबंध वर्ष 2017 से प्रभावी है और इसका सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
जानलेवा साबित हो रहा चाईनीज मांझा
पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार चाईनीज मांझे के कारण लगातार गंभीर हादसे सामने आए हैं। कई बार यह दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के गले या हाथ में उलझकर गंभीर चोट का कारण बनता है। कई मामलों में इसकी वजह से जान तक चली गई है। खासतौर पर पतंगबाजी के दौरान यह बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बन जाता है।
पक्षियों और पर्यावरण को भारी नुकसान
यह मांझा केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी अत्यंत घातक है। पेड़ों और बिजली के तारों में फंसा मांझा पक्षियों के पंख काट देता है या उन्हें जाल में फंसा कर मौत के मुंह में धकेल देता है। नायलोन से बना होने के कारण यह लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
कानून तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई व्यक्ति चाईनीज मांझे का निर्माण, बिक्री या उपयोग करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस, नगर निगम और संबंधित विभागों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
नागरिकों से सहयोग की अपील
प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल ने आम लोगों से अपील की है कि पतंग उड़ाने के लिए केवल पारंपरिक सूती धागे का ही उपयोग करें। साथ ही बच्चों को चाईनीज मांझे के खतरों के प्रति जागरूक करें, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके और पर्यावरण की रक्षा की जा सके।














