ब्रेकिंग
छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखा ममता बनर्जी को कड़ा पत्र प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल ईश्वर की अनुपम कृति हैं महिलाएं : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 4.24 करोड़ के विज्ञापन पर घमासान, भूपेश सरकार के फैसले की जांच के संकेत
रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छेरछेरा पर्व की दी बधाई, सुख-समृद्धि की कामना की

रायपुर| मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक पर्व छेरछेरा की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

छेरछेरा पर्व की महिमा

मुख्यमंत्री श्री साय ने छेरछेरा पर्व की पूर्व संध्या पर अपने शुभकामना संदेश में कहा कि छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ में नई फसल के घर आने की खुशी में पौष पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन दान करने की परंपरा को महत्व दिया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन और धान्य की कोई कमी नहीं होती।

सामाजिक समरसता और समृद्ध परंपरा का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि छेरछेरा पर्व महादान और फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो हमारी सामाजिक समरसता और दानशीलता के साथ-साथ हमारी समृद्ध और गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है।

मां शाकम्भरी जयंती और पौराणिक मान्यता

छेरछेरा पर्व के साथ-साथ इस दिन मां शाकम्भरी जयंती भी मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, जिसके कारण लोग इस दिन धान, साग-भाजी, और फल का दान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस पर्व को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाते हुए अपनी पारंपरिक संस्कृति और समाज के लिए सकारात्मक योगदान करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button