ब्रेकिंग
अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख प्रशिक्षु न्यायाधीश लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री श्री... बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पटरीपार सिकोला भाटा सब्जी मार्केट में निगम की बड़ी कार्रवाई, नाली के ऊपर बने 35 से अधिक अवैध निर्माण... छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी क... कबीरधाम में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू होगी बड़ी मुहिम नगरपालिकाओं एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम / उप निर्वाचन 2026 हेतु निर्वाचक नामावली कार्यक्रम जारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ निगम की सख्त कार्रवाई, कई दुकानों से डिस्पोजल गिलास व झिल्ली पन्नी जब्... राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का किया शिलान्यास
देश

न्याय की नई देवी: सुप्रीम कोर्ट में स्थापित हुई नई मूर्ति

नईदिल्ली । न्याय की देवी का रूप बदल गया है। सुप्रीम कोर्ट में न्याय की देवी की नई मूर्ति लगाई गई है। इस मूर्ति की आंखों से पट्टी हटा दी गई है जो कानून के अंधे होने का संकेत देती थी। उनके हाथ में तलवार की जगह संविधान है। ये मूर्ति सुप्रीम कोर्ट के जजों की लाइब्रेरी में लगाई गई है।

न्याय की देवी की नई मूर्ति CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने ऑर्डर देकर बनवाई है। इसका उद्देश्य ये संदेश देना है कि देश का कानून अंधा नहीं है। ये सजा का प्रतीक नहीं है। पुरानी मूर्ति की आंखों पर पट्‌टी ये बताती थी कि कानून की नजर में सब बराबर हैं। वहीं तलवार अथॉरिटी और अन्याय को सजा देने की शक्ति को दिखाती थी।

न्याय की देवी के दाएं हाथ में तराजू अब भी है। ये सामाजिक संतुलन का प्रतीक है। तराजू ये दिखाता है कि कोर्ट किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों के तथ्यों और तर्कों को देखते-सुनते हैं।

ब्रिटिश काल की धरोहर को पीछे छोड़ने की कोशिश के रूप में इस मूर्ति को देखा जा रहा है। हाल ही में भारत सरकार ने ब्रिटिश शासन के दौरान लागू इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू किया। लेडी ऑफ जस्टिस की मूर्ति में बदलाव भी इसी दिशा में एक कदम माना जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button