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दुर्ग

संभाग एवं जिला स्तरीय एमसीएमसी समिति का गठन

दुर्ग | छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर ने नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के आम चुनावों के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पेड न्यूज के मामलों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पेड न्यूज से आशय उन समाचारों से है, जो प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया आदि में विज्ञापन के रूप में नहीं बल्कि एक सामान्य समाचार के रूप में प्रकाशित या प्रसारित होते हैं। ये समाचार किसी विशेष राजनैतिक दल या अभ्यर्थी के पक्ष में होते हैं, जिससे मतदाताओं का झुकाव प्रभावित हो सकता है।

इसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए बाधक माना गया है। इस समस्या से निपटने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके तहत पेड न्यूज के मामलों को चिन्हित कर जांच करने हेतु जिला स्तर पर मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति का गठन किया गया है। यह समिति चुनावी प्रक्रिया के दौरान मीडिया में प्रसारित होने वाले सभी समाचारों की निगरानी करेगी। सामान्य निर्वाचन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया टीवी चौनल्स, केबल नेटवर्क एवं रेडियो चौनल पर राजनीतिक विज्ञापन देने के पूर्व अनिवार्य रूप से प्रमाणीकरण कराए जाने के दिशा निर्देश दिए गए हैं।

इन निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने के लिए लिखित आदेश जारी किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजनीतिक दलों व निर्वाचन अभ्यर्थियों को प्रिंट मीडिया मे विज्ञापनों का प्रमाणीकरण कराने के लिये निर्धारित प्रपत्र में प्रचार-प्रसार सामग्री की सॉफ्ट कॉपी मेन स्क्रिप्ट के साथ निर्वाचन के 48 घंटे पहले प्रस्तुत करनी होगी। आयोग के इस निर्देश का उल्लंघन होने पर संबंधित राजनीतिक दल अथवा उम्मीदवार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक विज्ञापनों के संवीक्षा व प्रसारण का प्रमाणीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने के लिये जिला स्तरीय मीडिया सर्टिफिकेशन एवं मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है। निर्धारित प्रपत्र में प्राप्त विज्ञापन की विषयवस्तु एवं मेन स्क्रिप्ट का भली भांति परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जायेगा कि इसके प्रसारण से किसी भी व्यक्ति, धर्म, संप्रदाय, जाति या वर्ग विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषा का उपयोग तो नहीं किया गया है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विज्ञापन के प्रसारण से आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।

संभाग स्तरीय एवं जिला स्तरीय एमसीएमसी समिति का गठन

जिले में पेड न्यूज पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संभाग स्तरीय एवं जिला स्तरीय एमसीएमसी समिति का गठन किया गया है। संभाग स्तरीय समिति के अध्यक्ष संभागायुक्त है और जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी है। सहयोग के लिए अनुविक्षण ईकाई में आठ अधिकारी/कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गयी है।

यह समिति निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के पश्चात मतदान की तिथि तक मीडिया में प्रकाशित या प्रसारित होने वाले समाचारों पर गहन निगरानी रखेगी। यदि कोई समाचार संदिग्ध पाया जाता है, तो उसे समिति द्वारा जांचा जाएगा और पेड न्यूज प्रमाणित होने पर उसका खर्च संबंधित अभ्यर्थी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।

नगर निगम,  नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों में खर्च की सीमा तय

नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग ने नगर निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के लिए व्यय सीमा निर्धारित की है। जिसके अनुसार नगर पालिक निगम जहां जनसंख्या पांच लाख से अधिक है, वहां के नगर निगम महापौर पद हेतु अधिकतम व्यय सीमा 25 लाख रुपये, जहां की जनसंख्या तीन लाख से पांच लाख तक हैं वहां के लिए 20 लाख रुपये तथा तीन लाख से कम जनसंख्या के लिए 15 लाख रुपये व्यय सीमा निर्धारित है।

इसी प्रकार नगर पालिका परिषद जहां जनसंख्या 50 हजार या उससे अधिक हो वहां के लिए 10 लाख रुपये और जहां की जनसंख्या 50 हजार से कम हैं वहां के लिए 8 लाख रुपये तथा नगर पंचायत के लिए 6 लाख रुपये व्यय सीमा निर्धारित की गई हैं।
चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के लिए सख्त नियम लागू किये गए है।

आगामी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी विज्ञापनों के लिए पूर्व मीडिया प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। इसमें टीवी, फिल्में, एलईडी साइन बोर्ड और ध्वनि विस्तारक उपकरणों के साथ चलित विज्ञापन शामिल हैं। राजनीतिक दलों, अभ्यर्थियों और व्यक्तियों, समूहों को विज्ञापन से पहले अनुमति लेनी होगी। प्रिंट मीडिया में मतदान से 48 घंटे पहले विज्ञापनों के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

निर्वाचन आयोग के निर्देश और प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशानुसार, पेड न्यूज की स्थिति में रिटर्निंग अधिकारी द्वारा संबंधित अभ्यर्थी को नोटिस जारी किया जाएगा। अभ्यर्थी को नोटिस का जवाब 48 घंटे के भीतर देना होगा। यदि अभ्यर्थी पेड न्यूज की बात मान लेते हैं, तो इसकी लागत सरकारी दरों के अनुसार निर्धारित कर अभ्यर्थी के चुनाव खर्च में जोड़ी जाएगी। यदि अभ्यर्थी पेड न्यूज होने से इंकार करते हैं तो मामला पुनः जिला स्तरीय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और समिति द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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