
भिलाई: सावन के महीने में भिलाई का जयंती स्टेडियम आस्था और भक्ति के बड़े केंद्र के रूप में सामने आया है। यहां आयोजित शिवमहापुराण कथा ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाकर भिलाई के नाम एक नई उपलब्धि जोड़ दी है। एक ही स्थान पर सावन में लगातार तीसरी बार पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा और पांच विशाल अस्थाई पंडालों के आयोजन को रिकॉर्ड के लिए दर्ज किया गया है। यह सम्मान बोलबम सेवा एवं कल्याण समिति के अध्यक्ष दया सिंह के नाम दर्ज हुआ।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के एशियन हेड मनीष विश्नोई ने पंडित प्रदीप मिश्रा की मौजूदगी में दया सिंह को रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र और मेडल प्रदान किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में शिवभक्त मौजूद रहे और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
तीन दिन तक टीम ने की आयोजन की पड़ताल
गोल्डन बुक की टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार तीन दिनों तक आयोजन का निरीक्षण और अध्ययन किया। एशियन हेड मनीष विश्नोई ने कहा कि कथा में शामिल होने के लिए जिस तरह बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, वह आयोजन की विशेषता को दर्शाता है।
इस उपलब्धि पर पंडित प्रदीप मिश्रा, पूर्व सांसद सरोज पांडेय, बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, भिलाई महापौर नीरज पाल, दुर्ग महापौर अलका बाघमार समेत कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने दया सिंह को बधाई दी।

शिव-पार्वती विवाह से जुड़े सात सवालों का बताया महत्व
कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव और माता सती के विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने शिवजी से पूछे गए सात सवालों के जरिए जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि संतोष सबसे बड़ा धन, क्रोध सबसे बड़ा रोग, सेवा सबसे बड़ा सुख और माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा तीर्थ है। उन्होंने अहंकार को मनुष्य के लिए सबसे बड़ा पाप बताते हुए दांपत्य जीवन में सम्मान और साथ निभाने को जरूरी बताया।
छत्तीसगढ़ के लक्ष्मणेश्वर महादेव की सुनाई महिमा
पंडित मिश्रा ने कथा के दौरान छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण और खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव की धार्मिक महत्ता भी बताई। उन्होंने भगवान राम के छत्तीसगढ़ आगमन और लक्ष्मण द्वारा पार्थिव शिवलिंग की पूजा से जुड़ा प्रसंग श्रद्धालुओं के सामने रखा।
सनातन धर्म को लेकर कही ये बात
सोशल मीडिया पर सनातन हिंदू धर्म और उसके त्योहारों का मजाक उड़ाने वालों पर भी पंडित प्रदीप मिश्रा ने टिप्पणी की। उन्होंने धार्मिक परंपराओं और त्योहारों के प्रति सम्मान रखने की बात कही।
प्रेम और समर्पण का दिया संदेश
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम की पहचान समर्पण और त्याग से होती है। भगवान शिव और माता सती के प्रसंग के जरिए उन्होंने प्रेम और विश्वास का महत्व समझाया। बेलपत्र के धार्मिक महत्व और माता शबरी की भक्ति से जुड़े प्रसंग भी कथा में सुनाए गए।
लगातार बारिश के बावजूद कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ बनी रही। भक्तिमय माहौल के बीच आयोजित इस कार्यक्रम के विश्व रिकॉर्ड में दर्ज होने से आयोजन समिति और शिवभक्तों में उत्साह का माहौल है।















