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दुर्ग

साइबर ठगी के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश

दुर्ग। साइबर ठगी के एक बड़े मामले में दुर्ग पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश किया है। 62 वर्षीय फरिहा अमीन कुरैशी, निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, बघेरा, ने 5 फरवरी 2025 को थाना कोतवाली दुर्ग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 21 अक्टूबर 2025 को उनके मोबाइल पर दिल्ली पुलिस डिपार्टमेंट से एक वीडियो कॉल आया।

वीडियो कॉल में उन्हें बताया गया कि सीबीआई द्वारा एक अपराधी संदीप कुमार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी और पहचान चोरी का मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान संदीप कुमार के कब्जे से 180 बैंक खाते मिले, जिनमें एक खाता फरिहा अमीन के नाम पर एचडीएफसी बैंक, दिल्ली में था। खाते में करीब 8.7 करोड़ रुपये जमा थे।

आरोपी पुलिस अधिकारी ने फरिहा अमीन को बयान देने दिल्ली बुलाया और मना करने पर ऑनलाइन बयान दर्ज कराने को कहा। इसके बाद आईपीएस सुनील कुमार गौतम से उनकी बातचीत कराई गई, जिन्होंने पूछताछ के बाद प्रार्थिया से उनकी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी मांगी। आरोपी ने यह भी कहा कि यह एक गोपनीय मामला है, जिसे किसी से साझा न करें।

इसके बाद फरिहा अमीन ने अपने भारतीय स्टेट बैंक, गंजपारा दुर्ग से अलग-अलग चरणों में 41 लाख रुपये आरबीआई इंडिया में ट्रांसफर कर दिए।

जांच में हुआ खुलासा

पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंद राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक चिराग जैन के निर्देशानुसार साइबर सेल भिलाई ने जांच शुरू की।

जांच में पता चला कि फरिहा अमीन द्वारा ट्रांसफर किए गए 9.5 लाख रुपये राजकोट नागरिक सहकारी बैंक, मोरबी (गुजरात) के आस्था लॉजिस्टिक संस्था के खाते में जमा हुए। यह खाता मनीष दोसी (46), निवासी मोरबी, गुजरात का था।

सीसीटीवी फुटेज में मनीष दोसी को बैंक से पैसा निकालते देखा गया, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि असरफ खान (45), निवासी सुरेंद्रनगर, गुजरात के निर्देश पर उसने यह रकम अपने खाते में मंगवाई थी।

क्रिप्टो करेंसी और हवाला रैकेट से जुड़ा मामला

असरफ खान के मोबाइल की जांच में क्रिप्टो करेंसी से जुड़े ऐप्स मिले। कड़ी पूछताछ में उसने कबूल किया कि साइबर ठगी से मिले पैसे को क्रिप्टो करेंसी के जरिए दुबई भेजा जाता था और हवाला के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था।

आरोपियों ने पुलिस को बताया कि ठगी की रकम कुछ ही घंटों में गुजरात के स्थानीय हवाला एजेंट्स के जरिए अन्य अपराधियों को भेज दी जाती थी।

पुलिस ने बरामद की संपत्तियां

आरोपियों के पास से
✅ पैसे गिनने की मशीन
✅ फोर्ड एंडेवर कार (GJ-13-CR-2422)
✅ अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।

आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

29 और 30 मार्च 2025 को मनीष दोसी और असरफ खान को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग लाया गया। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां उनके खिलाफ धारा 317(2), 317(4), 61(2)(ए) बीएनएस, 66(D) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस कार्रवाई में निरीक्षक विजय कुमार यादव, उपनिरीक्षक पूरनदास, आरक्षक सुरेश जायसवाल, एसीसीयू टीम के राज कुमार चंद्रा और चित्रसेन साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पुलिस आम जनता से अपील करती है कि साइबर ठगी से बचें और किसी भी संदिग्ध कॉल या ट्रांजेक्शन की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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