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लोकतंत्र की चेतावनी: 3.63 लाख मतदाता सूची से बाहर, जनता रही बेखबर

बिलासपुर : बिलासपुर में मतदाता सूची को लेकर गंभीर स्थिति बनती जा रही है। लोकतंत्र की बुनियाद माने जाने वाले वोट के अधिकार पर खतरा तब गहरा गया, जब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के प्रति जनता की उदासीनता खुलकर सामने आई। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में चल रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान के अंतिम चरण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

बिलासपुर जिले में इस प्रक्रिया के दौरान करीब 3 लाख 63 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, लेकिन इसके मुकाबले सिर्फ लगभग 50 हजार लोगों ने ही दावा-आपत्ति दर्ज कराई। इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने के बावजूद नागरिकों की सीमित प्रतिक्रिया ने प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है।

जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से जागरूकता के लिए व्यापक प्रयास किए गए। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को जानकारी दी गई, प्रचार-प्रसार किया गया और समय-सीमा की बार-बार जानकारी दी गई, फिर भी बड़ी संख्या में मतदाता सक्रिय नहीं हो सके। अब दावा-आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, अब केवल उन्हीं आवेदनों की जांच की जाएगी जो तय समय के भीतर जमा किए जा चुके हैं। दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 14 फरवरी 2026 तक चलेगी, जिसके बाद 21 फरवरी 2026 को बिलासपुर जिले की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।

निर्वाचन अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि जिन नागरिकों ने समय रहते आपत्ति दर्ज नहीं कराई, उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। इसका सीधा असर आगामी चुनावों में पड़ेगा, जहां ऐसे लोग मतदान के अधिकार से वंचित रह जाएंगे।

प्रशासन का कहना है कि लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी के लिए मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य है। अंतिम सूची जारी होने के बाद सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। ऐसे में मतदाता सूची को लेकर बरती गई यह लापरवाही आने वाले समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

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