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तलाक के बाद भी महिला के अधिकार बरकरार: शादी में मिला उपहार लौटाना अनिवार्य

कोच्चि | केरल हाईकोर्ट ने महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मज़बूती प्रदान करते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह के दौरान महिला को उपहार में मिले गहने और नकदी ‘स्त्रीधन’ माने जाएंगे, और तलाक के बाद इन्हें लौटाना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।

यह फैसला एर्नाकुलम जिले के कालामस्सेरी की एक महिला की याचिका पर सुनाया गया। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उसके द्वारा विवाह में मिले गहनों और उपहारों की वापसी की मांग को खारिज कर दिया गया था।

महिला ने अदालत को बताया कि वर्ष 2010 में विवाह के समय उसे परिवार और रिश्तेदारों से कुल 71 स्वर्ण मुद्राएं और गहने प्राप्त हुए थे। उसने आरोप लगाया कि ससुराल वालों ने ‘सुरक्षा’ के नाम पर अधिकतर गहने अपने पास रख लिए, और बाद में पति द्वारा ₹5 लाख की अतिरिक्त मांग के चलते रिश्ता टूट गया।

न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन और न्यायमूर्ति एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने इस मामले में ‘संभावनाओं के तराजू’ सिद्धांत को अपनाया और कहा कि स्त्रीधन महिला की निजी संपत्ति है, भले ही वह दस्तावेज़ों में दर्ज न हो। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में अधिकतर लेन-देन निजी होते हैं, जिससे महिलाओं को कानूनी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

यह निर्णय उन महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो तलाक के बाद अपनी संपत्ति की वापसी के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह फैसला न केवल महिलाओं के संपत्ति अधिकारों की पुष्टि करता है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी मिसाल भी बनेगा।

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